मर्कटासन योग का एक सरल पर बहुत प्रभावी आसन है, जिसे अंग्रेज़ी में "Monkey Pose" या "Spinal Twist Pose" भी कहा जाता है — संस्कृत में "मर्कट" का अर्थ बंदर होता है, और इस आसन में रीढ़ को जिस तरह मरोड़ा जाता है, वह इसी नाम से प्रेरित है। पीठ के बल लेट कर किया जाने वाला यह आसन खासतौर पर कमर दर्द और कब्ज़ जैसी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा यह रीढ़ की हड्डी की लचीलापन बढ़ाने, पाचन तंत्र को सक्रिय करने और सर्वाइकल जैसी समस्याओं में भी सहायक है। इस लेख में हम इसकी सही विधि, लाभ और ज़रूरी सावधानियों को विस्तार से समझेंगे।
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| मर्कटासन की सही अंतिम स्थिति — घुटने एक तरफ, गर्दन विपरीत दिशा में। |
विषय सूची
- मर्कटासन क्या है?
- मर्कटासन की विधि
- सावधानियां
- मर्कटासन के लाभ
- मर्कटासन करते समय होने वाली सामान्य गलतियां
- वर्जित स्थितियां
- सारांश
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मर्कटासन क्या है?
मर्कटासन एक सुपाइन ट्विस्ट (लेट कर की जाने वाली मरोड़) आसन है। इसमें पीठ के बल लेट कर घुटनों को बारी-बारी दाएं-बाएं मोड़ा जाता है, जबकि कंधे व हाथ स्थिर रहते हैं। इस विपरीत गति से रीढ़ की हड्डी को एक स्वाभाविक मरोड़ मिलती है, जो उसकी लचीलापन बढ़ाने के साथ-साथ पेट के आंतरिक अंगों पर भी हल्का दबाव डालती है। यही कारण है कि यह आसन कमर व पीठ की समस्याओं के साथ-साथ पाचन संबंधी समस्याओं में भी उतना ही उपयोगी माना जाता है।
रीढ़ से जुड़े अन्य उपयोगी आसनों के लिए देखें — रीढ़ के लिए आसन
मर्कटासन की विधि
मर्कटासन को सही क्रम में, सावधानी के साथ करना ज़रूरी है। इसे चरणबद्ध तरीके से समझें:
- पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैर मोड़ें, एड़ियां नितंबों के पास लाएं। एड़ी, पंजे व घुटने आपस में मिला कर रखें।
- दोनों हाथों को दाएं-बाएं फैला दें, ताकि वे कंधों की सीध में एक लाइन में आ जाएं। हाथों में हल्का खिंचाव बनाए रखें।
- श्वास भरें। भरे हुए श्वास में दोनों घुटनों को दाईं ओर ले जाकर धीरे से ज़मीन पर टिकाएं। साथ ही गर्दन को विपरीत दिशा — यानी बाईं ओर — घुमाएं। हाथों को खिंचा हुआ ही रखें। भरे श्वास की स्थिति में कुछ देर रुकें।
- क्षमता अनुसार रुकने के बाद श्वास छोड़ते हुए घुटनों को बीच में ले आएं। गर्दन को भी सीधा कर लें।
- फिर से श्वास भरें, और इस बार घुटनों को बाईं ओर तथा गर्दन को दाईं ओर मोड़ें। भरे श्वास की स्थिति में रुकें।
- क्षमता अनुसार रुकने के बाद श्वास छोड़ते हुए घुटनों को वापस बीच में ले आएं, गर्दन सीधी करें। यह एक आवृत्ति (round) पूरी हुई।
- अपनी क्षमता के अनुसार 4-5 आवृत्तियां करें।
- अभ्यास पूरा होने पर दोनों हाथों को शरीर के साथ रखें, घुटनों को धीरे-धीरे सीधा करते हुए पैर नीचे ले आएं। शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ कर कुछ देर विश्राम करें।
विशेष: अभ्यास पूरा होने के बाद पवनमुक्तासन करना विशेष रूप से लाभकारी रहता है — यह मर्कटासन से मिले प्रभाव को आगे बढ़ाकर पेट व आंतों को और अधिक सक्रिय करता है। कमज़ोर श्वसन क्षमता वाले व नए अभ्यासी श्वास रोकने का प्रयास न करें — सामान्य श्वास की गति से ही अभ्यास करें।
सावधानियां
- आसन हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करें — घुटनों को ज़बरदस्ती ज़मीन तक छूने का प्रयास न करें
- गति धीमी व नियंत्रित रखें, झटके से न करें
- शुरुआत में कम आवृत्तियों से करें, धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं
- खाली पेट, सुबह के समय अभ्यास करना उचित रहता है
- श्वास रोकने में कठिनाई हो या श्वसन-क्षमता कमज़ोर हो, तो सामान्य श्वास से ही अभ्यास करें, ज़बरदस्ती श्वास न रोकें
मर्कटासन के लाभ
मर्कटासन का प्रभाव केवल पेट तक सीमित नहीं है — यह शरीर के कई हिस्सों को एक साथ फायदा पहुंचाता है:
- कमर व पीठ दर्द में राहत — रीढ़ की विपरीत-दिशा मरोड़ से मांसपेशियां ढीली होती हैं, जिससे कमर व पीठ दर्द में आराम मिलता है। यह आसन स्पॉन्डिलाइटिस या साइटिका जैसी समस्याओं में भी लाभकारी होता है। लेकिन गंभीर रोगी इसका अभ्यास चिकित्सक और विशेषज्ञ की सलाह से करें।
- कब्ज़ व गैस में लाभकारी — पेट व आंतों पर पड़ने वाला हल्का दबाव पाचन-क्रिया को सक्रिय करता है, कब्ज व गैस की समस्या में राहत देता है
- रीढ़ की हड्डी में लचीलापन — नियमित अभ्यास से रीढ़ लचीली व मज़बूत बनती है
- सर्वाइकल में सहायक — यह अभ्यास कंधों, गर्दन और सर्वाइकल क्षेत्र को सुदृढ़ करता है।
- पसलियों व फेफड़ों के लिए अच्छा अभ्यास — गहरी श्वास के साथ किए जाने के कारण यह श्वसन-तंत्र को भी सक्रिय करता है
- मानसिक शांति व एकाग्रता — धीमी, नियंत्रित गति व श्वास शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क को भी शांत करती है
मर्कटासन करते समय होने वाली सामान्य गलतियां
- घुटनों को झटके से गिराना/नीचे टिकाना — इससे रीढ़ व कमर की मांसपेशियों पर अचानक दबाव पड़ सकता है, चोट का खतरा रहता है
- कंधों का ज़मीन से उठ जाना — इससे ट्विस्ट का असर रीढ़ की जगह कंधों पर चला जाता है, आसन का पूरा लाभ नहीं मिलता
- गर्दन को अचानक या बलपूर्वक मोड़ना — सर्वाइकल क्षेत्र में खिंचाव व दर्द हो सकता है
- श्वास क्षमता से अधिक रोकना — क्षमता से अधिक देर श्वास रोकना (विशेष तौर पर नए अभ्यासियों के लिए) हानिकारक हो सकता है। कमज़ोर श्वसन वाले व्यक्ति सामान्य श्वास से अभ्यास करें
- शरीर को ज़बरदस्ती मोड़ना — रीढ़ या मांसपेशियों में खिंचाव/चोट का खतरा बढ़ता है
वर्जित स्थितियां
निम्नलिखित स्थितियों में मर्कटासन का अभ्यास न करें:
- आंत के गंभीर रोगी
- कमर या रीढ़ की हाल ही में हुई सर्जरी
- गर्भावस्था के दौरान
- रीढ़ की गंभीर चोट या स्लिप-डिस्क की तीव्र अवस्था में — ऐसी स्थिति में केवल चिकित्सक की सलाह के बाद ही अभ्यास करें
सारांश
मर्कटासन एक सरल पर बहुप्रभावी आसन है, जो कमर दर्द, कब्ज़ व पाचन संबंधी समस्याओं के साथ-साथ रीढ़ की लचीलापन बढ़ाने में भी सहायक है। इसे सही विधि, धीमी गति व अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए, और गंभीर रीढ़-रोग या आंत-रोग की स्थिति में चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मर्कटासन के क्या लाभ हैं?
मर्कटासन कमर व पीठ दर्द, कब्ज़-गैस, रीढ़ की लचीलापन और सर्वाइकल जैसी समस्याओं में लाभकारी है। पूरी सूची के लिए ऊपर "मर्कटासन के लाभ" सेक्शन देखें।
मर्कटासन कब करना चाहिए?
सुबह खाली पेट सबसे उपयुक्त समय है। यदि सुबह संभव न हो, तो भोजन के 2-3 घंटे बाद भी किया जा सकता है।
मर्कटासन कितनी बार करना चाहिए?
शुरुआत में 3-4 आवृत्तियां पर्याप्त हैं। धीरे-धीरे क्षमता के अनुसार बढ़ाया जा सकता है।
क्या मर्कटासन कब्ज़ के लिए फायदेमंद है?
हां, यह आंतों पर हल्का दबाव डालकर पाचन-क्रिया को सक्रिय करता है, जिससे कब्ज़ व गैस में राहत मिलती है।
क्या स्लिप-डिस्क के रोगी मर्कटासन कर सकते हैं?
तीव्र अवस्था में नहीं। स्लिप-डिस्क की गंभीर स्थिति में रीढ़ पर मरोड़ डालना नुकसानदायक हो सकता है — ऐसे में चिकित्सक या योग-विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही अभ्यास करें।
क्या मर्कटासन साइटिका (कटिस्नायुशूल) में फायदेमंद है?
हल्के मामलों में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन यह कोई चिकित्सकीय उपचार नहीं है। गंभीर साइटिका में विशेषज्ञ की देखरेख के बिना अभ्यास न करें।
क्या मर्कटासन रोज़ाना किया जा सकता है?
हां, स्वस्थ व्यक्ति इसे नियमित रूप से रीढ़ की लचीलापन बनाए रखने के लिए रोज़ाना अपनी क्षमता के अनुसार कर सकते हैं।
Disclaimer: यह लेख किसी प्रकार के रोग का उपचार करने का दावा नहीं करता है। इसका उद्देश्य केवल योग के विषय में सामान्य जानकारी देना है। लेख में बताई गई विधि केवल स्वस्थ व्यक्तियों के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।
