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आज के समय मे अधिकतर लोग कब्जगैस की समस्या से पीड़ित हैं। गलत खान-पान, कम पानी पीना, तनाव तथा अनियमित जीवनशैली इसके मुख्य कारण हैं। पेट फूलना, ऐंठन और मल त्याग मे कठिनाई इसके सामान्य लक्षण हैं। संतुलित आहार के साथ-साथ योग इस समस्या मे बहुत प्रभावी सिद्ध होता है।

इस आर्टिकल मे कब्ज व गैस के लिए 5 कारगर योगासन, 3 योग क्रियाएं और उनके सही क्रम के बारे मे बताया गया है।

कब्ज व गैस से राहत के लिए अर्ध मत्स्येन्द्र आसन करते हुए व्यक्ति
कब्ज-गैस में राहत के लिए अर्ध मत्स्येन्द्र आसन का नियमित अभ्यास लाभकारी है।

विषय सूची:

कब्ज-गैस के कारण व लक्षण

अनियमित व गलत खान-पान, फल-सब्जियों की कमी, कम पानी पीना और तनावपूर्ण जीवनशैली के कारण पाचन क्रिया प्रभावित होती है। आंतों मे मल एकत्रित होकर धीरे-धीरे सख्त होने लगता है, जिससे मल त्याग मे कठिनाई होती है — इसे कब्ज (Constipation) कहा जाता है। पेट फूलना, ऐंठन और भूख कम लगना इसके सामान्य लक्षण हैं।

नियमित योगाभ्यास व संतुलित आहार से इस समस्या से राहत मिलती है।

कब्ज-गैस के लिए 5 कारगर योगासन

नीचे दी गई तालिका में इन 5 आसनों का सार एक नज़र में देखें:

आसन मुख्य लाभ सावधानी
कमर चक्रासन पेट के आंतरिक अंग (लीवर, पैंक्रियाज, आंत) सक्रिय कर पाचन सुदृढ़ करता है हर्निया, हाल की सर्जरी, गर्भावस्था व माहवारी काल में न करें
अर्ध मत्स्येन्द्र आसन जठराग्नि सक्रिय कर मल आगे बढ़ने में सहायता करता है रीढ़ की गंभीर समस्या, हर्निया व गर्भावस्था में न करें
पादोत्तान आसन आंतों को सुदृढ़ करता है अल्सर/हर्निया, गर्भावस्था/माहवारी, हाल की सर्जरी व वृद्ध व्यक्ति न करें
पवनमुक्तासन पेट की वायु व जमा मल बाहर निकालने में सहायक गर्दन-पीठ की गंभीर समस्या, गर्भावस्था व हर्निया में बल पूर्वक न करें
मर्कटासन रीढ़ को लचीला बनाता है, आंतों को टोन करता है रीढ़ की गंभीर चोट, हर्निया व गर्भावस्था में सावधानी बरतें

1. कमर चक्रासन (कटिचक्रासन)

बैठ कर किया जाने वाला यह आसन कमर को ट्विस्ट (मोड़ना) करते हुए बारी-बारी हाथ को विपरीत पैर के पंजे तक ले जाकर किया जाता है। इस मोड़ से पेट के आंतरिक अंग (लीवर, पैंक्रियाज, आंत) दबाव में आकर सक्रिय होते हैं, जिससे पाचन तंत्र सुदृढ़ होता है और कब्ज में राहत मिलती है।

सावधानी: झटके से या बल पूर्वक न करें; हर्निया, हाल की सर्जरी, गर्भावस्था व माहवारी काल में यह आसन न करें।

इस आसन की पूर्ण विधि व सावधानियां कमर चक्रासन लेख में विस्तार से दी गई हैं।

2. अर्ध मत्स्येन्द्र आसन

बैठकर रीढ़ व कमर को एक ओर मोड़ते हुए किया जाने वाला यह स्पाइनल-ट्विस्ट आसन है। मोड़ के कारण पेट व लीवर पर दबाव पड़ता है, जिससे जठराग्नि सक्रिय होती है और आंतों में जमा मल आगे बढ़ने में सहायता मिलती है।

सावधानी: रीढ़ की गंभीर समस्या, हर्निया व गर्भावस्था मे यह आसन न करें।

अर्ध मत्स्येन्द्र आसन की संपूर्ण विधि इस लेख में पढ़ें।

3. पादोत्तान आसन

पीठ के बल लेट कर, पैरों व हाथों को क्रम से ऊपर उठाकर किया जाने वाला यह आसन पेट की आंतों को सुदृढ करता है और कब्ज-गैस के लिए उत्तम माना जाता है। इसे 3 चरणों मे (एक-एक पैर से, फिर दोनों पैरों से) किया जाता है। इस आसन के बाद पवनमुक्तासन का अभ्यास करना लाभकारी होता है।

सावधानी: अल्सर/हर्निया रोगी, गर्भवती व माहवारी काल की महिलाएं, पेट की सर्जरी वाले तथा अधिक वृद्ध व्यक्ति यह आसन न करें।

4. पवनमुक्तासन

पीठ के बल लेट कर घुटनों को मोड़ते हुए छाती से लगाया जाने वाला यह आसन नाभि के पास एकत्रित दूषित वायु के निष्कासन तथा आंतों मे जमे मल को बाहर निकालने मे विशेष सहायक है — नाम स्वयं ही इसका प्रभाव बताता है (पवन = वायु, मुक्त = मुक्ति)। पादोत्तान आसन के तुरंत बाद करना अधिक लाभदायी है।

सावधानी: गर्दन-पीठ की गंभीर समस्या, गर्भावस्था व हर्निया मे बल पूर्वक न करें।

पवनमुक्तासन कैसे करें, इसकी पूरी जानकारी इस लेख में उपलब्ध है।

5. मर्कटासन

पीठ के बल लेट कर घुटने मोड़ते हुए दोनों ओर झुकाया जाने वाला यह स्पाइनल-ट्विस्ट आसन रीढ़ को लचीला बनाता है और आंतों को टोन करता है। नियमित अभ्यास से कब्ज मे विशेष राहत मिलती है।

सावधानी: रीढ़ की गंभीर चोट, हर्निया व गर्भावस्था मे सावधानी बरतें।

मर्कटासन का अभ्यास कैसे करें, इसकी विस्तृत विधि यहां पढ़ें।

अतिरिक्त उपयोगी आसन: पाचन तंत्र को मजबूत करने के लिए योगाभ्यास मे वज्रासन का भी विशेष महत्व है। इस मुद्रा-समूह मे किए जाने वाले आसन पेट के आंतरिक अंगों को सक्रिय करते हैं और पाचन क्रिया को सुदृढ़ करते हैं। इनमे प्रमुख आसन हैं — उष्ट्रासन, शशांक आसन, सुप्त वज्रासन व बालासन। इन सभी की विधि वज्रासन पोज़ के 4 आसन लेख में दी गई है।

आसनों का सही क्रम

अधिकतम लाभ के लिए आसनों को इस क्रम मे करें: कमर चक्रासन → अर्ध मत्स्येन्द्र आसन → वज्रासन पोज़ के आसन → पादोत्तान आसन → पवनमुक्तासन → मर्कटासन। पादोत्तान के तुरंत बाद पवनमुक्तासन करने से पेट की मांसपेशियों पर आया तनाव संतुलित होता है और परिणाम बेहतर मिलते हैं। अभ्यास पूरा करने के बाद सीधे लेट कर शवासन में कुछ देर विश्राम करें।

सहायक योग-क्रियाएं

आसनों के साथ कुछ योग क्रियाएं भी बताई गई हैं। ये कब्ज-गैस से राहत देने में विशेष लाभकारी होती हैं। इनमें तीन क्रियाएं विशेष महत्वपूर्ण हैं:

1. कुंजल क्रिया

इसे वमन धौति या गजकरणी भी कहा जाता है। सुबह खाली पेट गुनगुना नमक-पानी पीकर, वमन (उल्टी) के द्वारा उसे बाहर निकाला जाता है। इस क्रिया से पेट मे जमा अतिरिक्त अम्ल, कफ व विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं, जिससे कब्ज, गैस व एसिडिटी में राहत मिलती है।

सावधानी: इसे रोज न करें, महीने में एक या दो बार ही करें।

2. अग्निसार क्रिया

इस क्रिया में खाली श्वास मे पेट को बार-बार पीछे ले जाकर ढीला छोड़ा जाता है। इससे जठराग्नि (पाचन-अग्नि) सक्रिय होती है, आंतें प्रभावित होकर मल-रहित होती हैं और कब्ज से राहत मिलती है।

सावधानी: इसे अपनी श्वांसों की क्षमता के अनुसार ही करें; अस्थमा पीड़ित व हृदय रोगी जो श्वास रोकने मे असमर्थ हों, वे यह क्रिया न करें।

इन दोनों क्रियाओं की पूर्ण विधि, लाभ व सही क्रम पाचन तंत्र के लिए योग लेख में एक साथ बताया गया है।

3. कपालभाति क्रिया

सामान्यत: कपालभाति को प्राणायाम का अभ्यास माना जाता है, लेकिन मुख्यत: यह एक शुद्धि क्रिया है, जो कपाल भाग को प्रभावित करती है। तीव्र श्वास-प्रश्वास की यह क्रिया आंतों को उत्तेजित कर पाचन क्रिया तेज करती है। कब्ज-गैस के लिए सर्वाधिक अनुशंसित प्राणायाम क्रियाओं मे से एक मानी जाती है। इसकी पूर्ण विधि व सावधानियां कपालभाति प्राणायाम लेख में दी गई हैं।

सावधानियां व जीवनशैली सुझाव

  • सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना पाचन के लिए सहायक माना जाता है।
  • हल्का व सुपाच्य भोजन लें, फल व हरी सब्जियां आहार मे शामिल करें।
  • सभी अभ्यास अपनी क्षमता के अनुसार करें, बल प्रयोग न करें।
  • गर्भवती महिलाएं, हाल ही मे सर्जरी हुए व्यक्ति, तथा आंत के गंभीर रोगी डॉक्टर की सलाह के बिना ये क्रियाएं न करें।
सारांश: अनियमित व गलत खान-पान के कारण कब्ज व गैस की समस्या होती है। सही क्रम मे किए गए ये 5 योगासन तथा सहायक क्रियाएं पाचन तंत्र को मज़बूत बनाने मे प्रभावी हैं।

पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

कब्ज के क्या कारण होते हैं?
गलत खान-पान, फल-सब्जियों की कमी, कम पानी पीना, तनाव व अनियमित जीवनशैली कब्ज के मुख्य कारण हैं।

कब्ज के लक्षण क्या हैं?
पेट फूलना, ऐंठन, भूख कम लगना तथा मल त्याग मे कठिनाई कब्ज के सामान्य लक्षण हैं।

कब्ज दूर करने में योग का क्या प्रभाव होता है?
योगासन व शुद्धि-क्रियाएं पेट के आंतरिक अंगों को सक्रिय कर पाचन तंत्र को सुदृढ़ करती हैं, जिससे आंतों मे जमा मल आसानी से आगे बढ़ता है और कब्ज-गैस मे राहत मिलती है।

कब्ज-गैस ठीक करने के लिए कौन-से योगासन करें?
कमर चक्रासन, अर्ध मत्स्येन्द्र आसन, पादोत्तान आसन, पवनमुक्तासन व मर्कटासन — इन 5 आसनों को बताए गए सही क्रम में नियमित करने से कब्ज-गैस में लाभ मिलता है।

क्या योग से कब्ज ठीक हो सकती है?
सामान्य व आदतन कब्ज़ में नियमित योगाभ्यास व सही आहार से काफी राहत मिलती है। हालांकि किसी अन्य गंभीर रोग के कारण होने वाली कब्ज़ में चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।

कब्ज से राहत के लिए योग का असर कितने दिनों में होता है?
यह व्यक्ति की स्थिति, नियमितता व आहार पर निर्भर करता है — सामान्यत: 1-2 सप्ताह के नियमित अभ्यास व सही आहार से राहत महसूस होने लगती है।

Disclaimer: किसी प्रकार के रोग का उपचार करना इस लेख का उद्देश्य नहीं है। योग के विषय मे जानकारी देना इस लेख का उद्देश्य है। किसी प्रकार के रोग से पीड़ित होने पर चिकित्सक से सलाह लें।

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