आज के समय में कमर दर्द (Back Pain) एक आम समस्या बन गई है। अधिकांश लोग जीवन में कभी-न-कभी इस समस्या से गुज़रते हैं — विशेषकर Office-Workers, विद्यार्थी और लगातार बैठकर काम करने वाले व्यक्ति। इसका मुख्य कारण है अनियमित जीवनशैली, गलत posture और शारीरिक अभ्यास की कमी। रीढ़ के चोटग्रस्त होने के कारण भी पीठ दर्द हो सकता है। नियमित योगासन इसमें प्रभावी सिद्ध होते हैं। इस लेख में कमर दर्द के लिए 7 प्रभावी योगासन — इनकी सही विधि, लाभ व सावधानियों सहित — बताए जाएंगे।
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| वज्रासन: घुटनों के बल शांतिपूर्ण मुद्रा में बैठें। इस पोज में कुछ अन्य आसन भी किए जाते हैं जो कमर दर्द से राहत देते हैं। |
रीढ़ व कमर के लिए आसन का महत्व
रीढ़ हमारे शरीर का आधार है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए रीढ़ का लचीला होना ज़रूरी है। शारीरिक अभ्यास न करने से इसमें सख्ती आने लगती है, जो पीठ दर्द का कारण बनती है। (रीढ़ में चोट या तनाव की स्थिति में इनमें से कोई भी आसन डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।) योगाभ्यास में अधिकतर आसन रीढ़ को प्रभावित करते हैं, लेकिन इनमें ये 7 आसन विशेष महत्वपूर्ण हैं। इनका नियमित अभ्यास पीठ दर्द से राहत देता है तथा रीढ़ को स्वस्थ बनाए रखता है।
कमर दर्द से राहत के लिए आसन
अभ्यास से पहले योगा-मैट या कपड़े की सीट बिछाएं। आरम्भ में खड़े होकर शरीर को वार्म-अप करें, फिर आसन (सीट) पर बैठ जाएं। हाथ पीछे टिकाएं और कुछ सेकंड विश्राम के बाद अभ्यास आरम्भ करें। आसन का अभ्यास सही क्रम में इस प्रकार करें -
1. पश्चिमोत्तान आसन
यह बैठकर किया जाने वाला आसन है। यह पीठ दर्द के लिए उत्तम आसन है। इस आसन से कमर, पीठ तथा पैरों की मांसपेशियां प्रभाव में आती हैं।
पश्चिमोत्तान शब्द 'पश्चिम' और 'उत्तान' से मिलकर बना है। यहां 'पश्चिम' का अर्थ 'पीछे' या 'पीठ' (Back) है, तथा 'उत्तान' का अर्थ 'खिंचाव' है। इस आसन का प्रभाव विशेष रूप से पीठ पर पड़ता है, इसीलिए इसे पश्चिमोत्तान आसन कहा गया है।
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| पश्चिमोत्तान आसन: यह आसन रीढ़ को लचीला बनाता है और कमर दर्द से राहत देता है। |
- मैट या कपड़े की सीट पर बैठें। दोनों पैर सामने की ओर सीधा करें। एड़ी, पंजे व घुटने मिलाकर रखें। दोनों हाथों को घुटनों पर रखें।
- रीढ़ व गर्दन को सीधा रखें। आंखें कोमलता से बंद करें।
- धीरे-धीरे दोनों हाथ सामने की ओर से ऊपर उठाएं। श्वास भरते हुए हाथों को ऊपर की ओर खींचें। श्वास छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें।
- दोनों हाथों से पैर के पंजे पकड़ने का प्रयास करें। माथा घुटनों के पास ले जाने का प्रयास करें। श्वास सामान्य करके इस स्थिति में कुछ देर रुकें।
- क्षमता अनुसार रुकने के बाद श्वास भरते हुए ऊपर उठें। हाथों को दांए-बांए से नीचे ले आएं और पीछे टिकाएं। पैरों के बीच थोड़ी दूरी बनाकर विश्राम करें।
- धीमी गति से आगे झुकें और धीमी गति से ऊपर उठें।
- सरलता से जितना झुक सकते हैं, उतना ही झुकें — पूर्ण स्थिति तक पहुंचने के लिए बल प्रयोग न करें।
- रीढ़ की परेशानी, पेट में हर्निया या गंभीर आंत-रोग होने पर यह आसन न करें।
- पेट या पैर की सर्जरी हुई हो या गर्भावस्था हो, तो यह आसन न करें।
2. कमर चक्रासन
यह बैठकर किया जाने वाला आसन है, जिसे कटिचक्रासन भी कहा जाता है। इसका मुख्य प्रभाव रीढ़, कमर, पेट तथा जांघों पर पड़ता है। इसमें कमर को दोनों दिशाओं में ट्विस्ट किया जाता है, जिससे कमर व पीठ की जकड़न दूर होती है और यह कमर दर्द में विशेष सहायक है।
इसकी पूरी विधि, लाभ व सावधानियां कमर चक्रासन लेख में विस्तार से बताई गई हैं।
3. वज्रासन पोज के आसन
वज्रासन पोज में आ जाएं — घुटने मोड़कर बैठें। इस मुद्रा में कुछ महत्वपूर्ण आसन किए जाते हैं, जिनमें रीढ़ व कमर के लिए दो आसन विशेष माने गए हैं। ये दोनों एक-दूसरे की विपरीत दिशा में किए जाते हैं, इसलिए इन्हें एक-दूसरे का पूरक आसन माना जाता है।
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| वज्रासन पोज में किए जाने वाले उष्ट्रासन और शशांक आसन एक-दूसरे की विपरीत दिशा में किए जाने वाले पूरक अभ्यास हैं। |
उष्ट्रासन
यह आसन वज्रासन की स्थिति में बैठकर किया जाता है। संस्कृत में 'उष्ट्र' का अर्थ ऊंट (Camel) है — इस आसन में ऊंट जैसी आकृति बनने से इसे उष्ट्रासन (Camel Pose) कहा गया है। इसमें रीढ़ को पीछे की ओर झुकाया जाता है, जिससे यह कमर दर्द में विशेष लाभकारी है।
शशांक आसन
यह आसन भी वज्रासन की स्थिति में किया जाता है। संस्कृत में 'शशांक' का अर्थ खरगोश (Rabbit) है — इस आसन में खरगोश जैसी आकृति बनने से इसे शशांक आसन (Rabbit Pose) कहा गया है। इसमें रीढ़ को आगे की ओर झुकाया जाता है।
उष्ट्रासन में रीढ़ को पीछे की ओर तथा शशांक आसन में आगे की ओर झुकाया जाता है — इस तरह दोनों आसन मिलकर रीढ़ को संतुलित करते हैं। इन दोनों आसनों की पूरी विधि, लाभ व सावधानियां वज्रासन पोज के आसन में विस्तार से बताई गई हैं।
4. भुजंग आसन
पेट के बल लेटकर किया जाने वाला यह आसन कमर व रीढ़ को प्रभावित करता है और कमर दर्द में प्रभावी है। 'भुजंग' का अर्थ सर्प (Cobra) है — इस आसन में सर्प जैसी आकृति बनने से इसे भुजंग आसन (Cobra Pose) कहा गया है।
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| भुजंगासन पेट के बल लेटकर किया जाने वाला आसन है, जिसमें ऊपरी शरीर को धीरे-धीरे ऊपर उठाया जाता है। |
इसकी सम्पूर्ण विधि, लाभ व सावधानियां भुजंगासन लेख में देखें।
5. धनुरासन
धनुरासन भी पेट के बल लेटकर किया जाने वाला आसन है। यह रीढ़ व कमर को प्रभावित करता है और भुजंग आसन के साथ किया जाने पर अधिक लाभकारी होता है। आसन की पूर्ण स्थिति धनुष जैसी बनती है, इसीलिए इसे धनुरासन कहा गया है।
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| धनुरासन में पेट के बल लेटकर पैरों के टखनों को पकड़ते हुए शरीर को धनुष जैसी आकृति दी जाती है। |
- पेट के बल लेट जाएं। दोनों पैर मोड़ें, एड़ियां नितम्ब के पास लाएं।
- दोनों हाथों से पैर के टखने मज़बूती से पकड़ें। घुटने एक साथ रखें।
- हाथों से पैरों को ऊपर की ओर खींचते हुए घुटने ऊपर उठाएं। साथ ही सीना भी ऊपर उठाएं।
- शरीर आगे-पीछे से उठाने के बाद मध्य भाग पर संतुलन बनाएं। पूर्ण स्थिति में क्षमता अनुसार रुकें।
- वापसी के लिए सीना नीचे टिकाएं, पैर सीधे करें, शिथिल आसन में विश्राम करें।
- दोनों घुटने एक साथ रखने का प्रयास करें। यदि साथ उठाना कठिन हो, तो पहले एक फिर दूसरा घुटना उठाएं।
- सरलता से करें, अधिक बल प्रयोग न करें।
- रीढ़ व पेट के रोगी तथा गर्भवती महिलाएं यह आसन न करें।
6. हलासन
हलासन रीढ़ के लिए लाभदायी आसन है। यह पीठ के बल लेटकर किया जाता है और रीढ़ को लचीला बनाता है। पूर्ण स्थिति में शरीर की आकृति हल (Plow) जैसी बनने से इसे हलासन (Plow Pose) कहा गया है।
आसन की विधि :- पीठ के बल सीधे लेटें। दोनों पैर एक साथ रखें, हाथ शरीर के साथ, हथेलियां नीचे की ओर।
- श्वास भरते हुए दोनों पैर धीमी गति से ऊपर उठाएं। घुटने सीधे रखें। कुछ देर रुकें।
- श्वास छोड़ते हुए पैरों को सिर की ओर पीछे ले जाएं। घुटने सीधे रखते हुए, क्षमता अनुसार पैरों को नीचे टिकाने का प्रयास करें। पूर्ण स्थिति में कुछ देर रुकें।
- धीरे-धीरे पीठ नीचे टिकाएं, घुटने सीधे रखते हुए पैर नीचे लाएं। थोड़ी देर विश्राम करें।
- विश्राम के बाद चक्रासन करें।
7. चक्रासन
यह हलासन का विपरीत आसन है, इसलिए हलासन के बाद किया जाना लाभकारी है। यह पीठ व कमर के लिए उत्तम अभ्यास है, जिसमें रीढ़ पीछे की ओर प्रभावित होती है। 'चक्र' का अर्थ पहिया है — गोल आकृति बनने से इसे चक्रासन (Wheel Pose) कहा गया है।
आसन की विधि :- पीठ के बल लेटें। दोनों पैर मोड़ें, एड़ियां नितम्ब के पास रखें। हाथ सिर के पास, हथेलियां कंधों की ओर।
- धीरे-धीरे मध्य भाग ऊपर उठाएं। हाथों और पैरों के पंजों पर संतुलन बनाकर रुकें।
- क्षमता अनुसार रुकने के बाद मध्य भाग धीरे से नीचे टिकाएं, पैर सीधे करें, विश्राम करें।
- शरीर का मध्य भाग अपनी क्षमता अनुसार उठाएं, परेशानी होने पर वापिस आ जाएं।
- रीढ़ के क्षतिग्रस्त होने, गंभीर पेट-रोग या गर्भावस्था में यह आसन न करें।
कमर दर्द में करें और न करें
| करें | न करें |
|---|---|
| धीमी गति से आसन की पूर्ण स्थिति में जाएं, कुछ देर रुकें और धीरे-धीरे वापस आ जाएं। | पूर्ण स्थिति में जाने के लिए बल प्रयोग न करें। |
| पूर्ण स्थिति में पहुंचने पर अपनी शारीरिक क्षमता अनुसार रुकें। | जहां परेशानी अनुभव हो, रुक जाएं और धीरे से वापस आ जाएं। |
| आसन का चयन अपने शरीर की क्षमता और आवश्यकता अनुसार करें। | क्षमता से अधिक अभ्यास न करें। |
| नए अभ्यासी आरम्भ में सरल आसन का अभ्यास करें। | नए अभ्यासी आरम्भ में कठिन आसन का अभ्यास न करें। |
| एक आसन का अभ्यास करने के बाद कुछ सेकंड विश्राम करके अगला अभ्यास करें। | बिना रुके, जल्दी-जल्दी और लगातार अभ्यास न करें। |
| रोग की आरंभिक अवस्था में चिकित्सक की सलाह से कुशल निर्देशन में अभ्यास करें। | गंभीर रोग की अवस्था में अभ्यास न करें, चिकित्सा सहायता लें। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
कमर दर्द (Back Pain) का क्या कारण होता है?
मुख्य कारण हैं — अनियमित जीवनशैली, लगातार बैठकर काम करना, गलत posture, शारीरिक अभ्यास की कमी और रीढ़ का चोटग्रस्त होना।
क्या कमर दर्द से राहत के लिए आसन लाभकारी होते हैं?
हां, नियमित योगासन रीढ़ को लचीला बनाकर सख्ती दूर करते हैं, मांसपेशियों को मज़बूत करते हैं और कमर दर्द से राहत में सहायक होते हैं।
कमर दर्द से राहत के लिए कौन-सा आसन करें?
पश्चिमोत्तान, कमर चक्रासन, उष्ट्रासन, शशांक, भुजंग, धनुरासन, हलासन व चक्रासन — ये आसन कमर दर्द से राहत के लिए विशेष रूप से प्रभावी माने गए हैं।
कमर दर्द में कौन से आसन नहीं करने चाहिए?
तेज़ी से आगे झुकने वाले या मरोड़ (Twist) वाले आसन बिना सही मार्गदर्शन के न करें। दर्द गंभीर हो तो पहले चिकित्सक से सलाह लें।
ये आसन रोज़ कितनी देर करने चाहिए?
अवधि व्यक्ति की क्षमता पर निर्भर करती है — विस्तृत मार्गदर्शन के लिए योग कितनी देर तक करें? लेख देखें।
सारांश
अनियमित दिनचर्या से रीढ़ सख्त हो जाती है, जो कमर व पीठ दर्द का कारण बनती है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए रीढ़ का लचीला होना ज़रूरी है। लेख में बताए गए 7 आसन पीठ दर्द से बचाव व राहत के लिए प्रभावी हैं। इन्हें नियमित रूप से, सही विधि व सावधानी के साथ करें।
Disclaimer :- यह लेख किसी प्रकार के रोग-उपचार का दावा नहीं करता है। इस लेख का उद्देश्य केवल योग के लाभ व सावधानियों की जानकारी देना है। इसमें बताए गए अभ्यास केवल स्वस्थ व्यक्तियों के लिए हैं। रोगग्रस्त होने पर आसन न करें और चिकित्सा सहायता लें।




