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साधारणतया यह धारणा होती है कि कठिन आसनों से अधिक लाभ मिलता है, लेकिन यह सही नहीं है। सरल योगासन स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभदायी होते हैं, जबकि कठिन आसन कई बार हानिकारक भी हो जाते हैं। अत: स्वास्थ्य-लाभ के लिए सरल योगासन ही करने चाहिए। ये आसन कौन से हैं, और इनका अभ्यास कैसे किया जाए — प्रस्तुत लेख में यह पूरी जानकारी दी गई है।

सरल योगासन का अभ्यास करते वृद्ध स्त्री-पुरुष अभ्यासी
सरल आसन व वार्मअप का अभ्यास करते हुए अभ्यासी।

विषय सूची :

योगाभ्यास में सरल आसन का महत्व
अभ्यास कैसे करें
सरल योगासनों की सूची
अभ्यास की सावधानियां
सामान्य प्रश्न

योगाभ्यास में सरल आसन का महत्व

"आसन" योग का एक महत्वपूर्ण अंग है। योगाभ्यास में सरल आसनों का महत्व इसलिए अधिक है, क्योंकि ये स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित व स्थायी लाभ देते हैं। महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र में आसन की परिभाषा "स्थिरसुखम् आसनम्" के रूप में दी है — अर्थात् स्थिरता और सुखपूर्वक अवस्था में रुकना ही आसन है। जो आसन सुखपूर्वक किया जा सके, वही सरल-आसन कहलाता है।

अभ्यास कैसे करें

'आसन' का अभ्यास करने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता का अवलोकन करें, और उसी के अनुसार अभ्यास करें। हल्के जोड़-घुमाव (वार्म-अप) से शुरुआत करें, फिर ऐसे आसनों का चयन करें जो सरलता से किए जा सकें। जिस आसन को करने में शरीर को सुख (आराम) का अनुभव हो, उसी का अभ्यास करना चाहिए। यह अभ्यास सही क्रम से इस प्रकार करें :

सरल योगासनों की सूची

खड़े होकर किए जाने वाले आसन

अभ्यास का आरंभ खड़े होकर किए जाने वाले आसनों से करें।

ताड़ासन — पैरों को मिलाकर सीधे खड़े हो जाएं। दोनों हाथों को ऊपर करें, श्वास भरते हुए हाथों को ऊपर की ओर खींचें, श्वास छोड़ते हुए नीचे ले आएं।

लाभ — रीढ़ प्रभावित होती है, शरीर आगे के अभ्यास के लिए तैयार हो जाता है।

त्रिकोण आसन — पैरों के बीच सुविधाजनक दूरी रखकर खड़े हो जाएं। आगे झुकते हुए दायां हाथ बाएं पंजे के पास ले जाएं, ऊपर उठें, फिर बायां हाथ दाएं पंजे के पास ले जाएं। यह एक आवृत्ति पूरी हुई; क्षमता अनुसार दोहराएं।

लाभ — कमर व कूल्हों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

बैठ कर किए जाने वाले आसन

पैरों को सामने फैला कर बैठ जाएं, और यहां से अगला अभ्यास करें।

तितली आसन — बैठ कर दोनों पैरों के तलवे आपस में मिलाएं, एड़ियों को शरीर के पास लाने का प्रयास करें, घुटनों को हल्के-हल्के ऊपर-नीचे हिलाएं।

लाभ — कूल्हों व जांघों की जकड़न दूर होती है।

वज्रासन — घुटनों के बल बैठ कर एड़ियों पर शरीर का भार टिकाएं, रीढ़ सीधी रखें, दोनों हाथ घुटनों पर रखें।

लाभ — पाचन तंत्र सुदृढ़ होता है; यह भोजन के तुरंत बाद भी किया जा सकने वाला एकमात्र आसन है।

पेट के बल लेट कर किए जाने वाले आसन

बैठ कर किए जाने वाले आसनों के बाद पेट के बल लेट जाएं, और इस स्थिति में अभ्यास करें।

भुजंगासन — पेट के बल लेट कर हथेलियां कंधों के पास रखें, धीरे-धीरे छाती ऊपर उठाएं।

लाभ — रीढ़ लचीली होती है, कंधे व पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। गर्दन या रीढ़ की समस्या हो तो अभ्यास से पहले इसकी सावधानियां जान लेना उचित रहेगा।

मकरासन — पेट के बल लेट कर हाथों पर ठुड्डी टिकाएं, दोनों पैरों को बारी-बारी मोड़ें और सीधा करें।

लाभ — गहरा विश्राम मिलता है, थकान दूर होती है।

पीठ के बल लेट कर किए जाने वाले आसन

करवट बदल कर पीठ के बल आ जाएं, और कुछ आसन इस अवस्था में करें।

मर्कटासन — पीठ के बल लेट कर दोनों पैर मोड़ें, हाथ कंधों की सीध में फैलाएं, घुटनों को बारी-बारी दाएं-बाएं झुकाएं।

लाभ — कमर, पेट व रीढ़ को लाभ मिलता है, पाचन तंत्र मजबूत होता है। इसका अभ्यास-क्रम अलग लेख में विस्तार से समझाया गया है।

पवनमुक्तासन — पैर मोड़ें, घुटनों को हाथों से पेट की ओर दबाएं, सिर घुटनों के पास लाने का प्रयास करें।

लाभ — कब्ज से राहत मिलती है। कब्ज व गैस की समस्या में यह आसन विशेष प्रभावी है — इसकी पूरी प्रक्रिया एक समर्पित लेख में दी गई है।

अंत में विश्राम के लिए शवासन

पीठ के बल लेट कर आंखें बंद करें, पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें, श्वास सामान्य करें, ध्यान शरीर पर केंद्रित रखें।

लाभ — मानसिक शांति मिलती है, अभ्यास का तनाव दूर होता है और शरीर सामान्य स्थिति में लौट आता है।

अभ्यास की सावधानियां

• आसन की पूर्ण अवस्था में पहुंचें; यदि पीड़ा हो तो आगे अभ्यास न करें।
• सरलता से पूर्ण अवस्था तक पहुंचें तो कुछ देर रुकने का प्रयास करें, फिर धीरे-धीरे वापस आएं।
• एक आसन के बाद विश्राम करें, फिर अगला आसन करें।
• अभ्यास के दौरान चक्कर या अस्थिरता महसूस हो, तो तुरंत रुक जाएं।
• सभी आसनों के बाद अंत में शवासन में विश्राम करें।
• आसन के बाद सरलता से प्राणायाम का अभ्यास अवश्य करें।

आसन के नियमों की पूरी जानकारी एक अलग लेख में विस्तार से दी गई है।

सामान्य प्रश्न

सरल आसन लाभकारी क्यों होते हैं?
सरल आसन शरीर पर अनावश्यक दबाव नहीं डालते, इसलिए इन्हें सुखपूर्वक और नियमित रूप से किया जा सकता है। पतंजलि योगसूत्र के अनुसार जो आसन स्थिरता व सुख के साथ किया जाए, वही अधिक लाभदायी होता है।

क्या कठिन आसन अधिक लाभदायी होते हैं?
नहीं। कठिन आसन बलपूर्वक करने पर मांसपेशियों व जोड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सरल आसन ही सुरक्षित और स्थायी लाभ देते हैं।

क्या सरल आसन कम लाभकारी होते हैं?
नहीं, सरल आसन कम प्रभावी नहीं होते। नियमित रूप से किए गए सरल आसन शरीर को उतना ही लाभ पहुंचाते हैं जितना सही ढंग से किया गया कठिन आसन।

क्या बिना प्रशिक्षण के आसन का अभ्यास किया जा सकता है?
सरल आसनों का अभ्यास स्वयं भी किया जा सकता है, लेकिन सही विधि की जानकारी होना जरूरी है। कठिन आसनों का अभ्यास प्रशिक्षक की देखरेख के बिना नहीं करना चाहिए।

सारांश : स्वास्थ्य-लाभ के लिए अभ्यास अपने शरीर की क्षमता के अनुसार करना चाहिए। कठिन आसन लाभकारी ही हों, यह जरूरी नहीं — ये कई बार हानिकारक भी हो सकते हैं, जबकि सरल आसन नियमित अभ्यास से अधिक सुरक्षित व लाभकारी सिद्ध होते हैं।
Disclaimer : योगासन अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करें। अभ्यास में अनावश्यक बल प्रयोग न करें। आरम्भ में प्रशिक्षक के निर्देशन में अभ्यास करें। अस्वस्थ होने पर अभ्यास न करें।

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