शारीरिक स्वास्थ्य के लिए योगाभ्यास प्राचीन काल से होता आ रहा है। ऐसा माना जाता है कि योग का आरम्भ भारत से ही हुआ है। आज के समय में पूरी दुनिया इसको स्वास्थ्य के लिए अपना रही है। यह शरीर को रोगों से बचाए रखने की एक उत्तम विधि है, लेकिन क्या रोग की स्थिति में भी योग करना चाहिए? एक बीमार व्यक्ति को योगाभ्यास में कौन-सी सावधानियां बरतनी चाहिए? प्रस्तुत लेख में इन्हीं विषयों पर चर्चा करेंगे।
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| सरल स्ट्रेच — रोग की आरंभिक अवस्था में सावधानी सहित किया जा सकने वाला अभ्यास। |
विषय सूची
- क्या योग रोगों से बचाव करता है
- स्वस्थ व्यक्ति के लिए योगाभ्यास
- आरम्भिक रोगी के लिए योग
- गम्भीर रोगी के लिए योग
- सारांश
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या योग रोगों से बचाव करता है?
योग का अभ्यास मुख्यतः स्वस्थ व्यक्तियों के लिए बताया गया है, और उनके लिए यह अभ्यास शरीर को रोगों से बचाए रखने में सहायक होता है। प्राय: यह प्रश्न पूछा जाता है कि क्या योग से रोगों का इलाज संभव है? योग को सीधे रोग-उपचार का साधन नहीं मानना चाहिए। नियमित अभ्यास शरीर के अंगों को सक्रिय करता है, जिससे शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है, रीढ़ स्वस्थ रहती है, हृदय व श्वसन तंत्र सुदृढ़ होते हैं, तथा रक्तचाप व शुगर संतुलित रहते हैं।
एक बड़े शोध-सर्वे के अनुसार योग-अभ्यास के दौरान कुछ प्रतिकूल अनुभव (adverse events) भी सामने आते हैं। यह जोखिम पहले से किसी बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों में अपेक्षाकृत अधिक पाया गया है। इसीलिए रोग की स्थिति में योग सावधानी से करना चाहिए — आगे यह विषय स्वस्थ, आरंभिक व गम्भीर रोगियों के नज़रिए से अलग-अलग समझाया गया है:
| श्रेणी | योगाभ्यास | मुख्य सावधानी |
|---|---|---|
| स्वस्थ व्यक्ति | आसन, प्राणायाम व ध्यान — सभी अभ्यास सही क्रम में कर सकते हैं | अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास करें, बलपूर्वक न करें |
| आरम्भिक रोगी (कब्ज, गैस, रक्तचाप, बैक पेन, शुरुआती श्वास-हृदय रोग) |
सरल आसन व सरल प्राणायाम का अभ्यास कुशल निर्देशन में करें | चिकित्सक की सलाह जारी रखें, दवा/औषधि का सेवन बंद न करें, कठिन अभ्यास न करें |
| गम्भीर रोगी (गम्भीर हृदय-श्वास रोग, हाल की सर्जरी, रीढ़ के गम्भीर रोग, गर्भावस्था की पूर्ण अवस्था) |
योगाभ्यास सर्वथा वर्जित | बिना चिकित्सक की सलाह व कुशल निर्देशन के कोई अभ्यास न करें |
स्वस्थ व्यक्ति के लिए योगाभ्यास
स्वस्थ व्यक्तियों के लिए यह सिद्धांत सटीक बैठता है कि योग रखे निरोग। स्वस्थ व्यक्ति योग के लगभग सभी अभ्यास कर सकते हैं, बशर्ते अपनी क्षमता का ध्यान रखा जाए। क्षमता से अधिक व बलपूर्वक कोई अभ्यास न करें। योगाभ्यास में आसन, प्राणायाम व ध्यान — तीनों का सही क्रम से अभ्यास किया जाना चाहिए।
स्वस्थ व्यक्ति के लिए योगाभ्यास लाभकारी होता है, लेकिन जो व्यक्ति पहले से किसी रोग से पीड़ित है, उसे कैसे आगे बढ़ना चाहिए?
आरम्भिक रोगी के लिए योग
रोग की आरम्भिक अवस्था में योग का अभ्यास लाभकारी हो सकता है — जैसे कब्ज, गैस, एसिडिटी, रक्तचाप, बैक पेन या श्वास-हृदय रोग की शुरुआती अवस्था में। आरम्भिक रोगियों को योगाभ्यास में इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- सरल अभ्यास करें — सरल आसन व सरल प्राणायाम का ही अभ्यास करें; कठिन अभ्यास हानिकारक हो सकते हैं
- चिकित्सक की सलाह लें — योग के साथ चिकित्सा सहायता भी जारी रखें; किसी औषधि का सेवन चिकित्सक की सलाह के बिना बंद न करें
- क्षमता के अनुसार अभ्यास करें — शारीरिक क्षमता से अधिक कोई अभ्यास न करें
गम्भीर रोगी के लिए योग
रोग की गम्भीर अवस्था में योग सर्वथा वर्जित है, और कुशल निर्देशन के बिना कोई अभ्यास नहीं करना चाहिए। रोग की कुछ विशेष स्थितियां होती हैं जब योग नहीं करना चाहिए। संक्षेप में, यह गम्भीर हृदय व श्वास रोगियों, हाल ही में हुई शल्य क्रिया (सर्जरी), रीढ़ के गम्भीर रोग, तथा गर्भावस्था की पूर्ण अवस्था पर लागू होता है। ऐसी स्थितियों में चिकित्सक की सलाह के बिना कोई अभ्यास नहीं करना चाहिए।
सारांश
योग का अभ्यास स्वस्थ व्यक्तियों के लिए बताया गया है और यह निरोग रहने में सहायक होता है। रोग की आरम्भिक अवस्था में सावधानी व सरल अभ्यास से योग लाभकारी हो सकता है, जबकि गम्भीर अवस्था में यह वर्जित है — ऐसी स्थिति में चिकित्सक की सलाह अनिवार्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या रोग की स्थिति में योग करना चाहिए?
यह रोग की अवस्था पर निर्भर करता है — आरम्भिक अवस्था में सावधानी से किया गया सरल अभ्यास लाभकारी हो सकता है, गम्भीर अवस्था में योग वर्जित है।
क्या योग बीमारी को ठीक कर सकता है?
योग रोग-उपचार का साधन नहीं है; यह शरीर को मजबूत बनाकर रोगों से बचाव में सहायक है।
आरम्भिक रोगी को कौन-सी सावधानियां रखनी चाहिए?
सरल आसन-प्राणायाम करें, चिकित्सक की सलाह जारी रखें, और अपनी क्षमता से अधिक अभ्यास न करें।
गम्भीर रोगी के लिए योग कब वर्जित है?
गम्भीर हृदय-श्वास रोग, हाल की सर्जरी, रीढ़ के गम्भीर रोग व गर्भावस्था की पूर्ण अवस्था में योग वर्जित माना जाता है।
Disclaimer: यह लेख किसी प्रकार के रोग उपचार हेतु नहीं है। रोग की अवस्था में चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। चिकित्सक की सलाह के बिना कोई अभ्यास न करें। यह लेख केवल योग की सामान्य जानकारी देने के लिए है।
