योगाभ्यास स्वास्थ्य के लिए एक उत्तम और प्रभावी विधि है। प्राचीन समय में योग केवल आध्यात्मिक साधना का विषय था, लेकिन आज यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पूरी दुनिया में अपनाया जा रहा है।
आज अधिकतर लोग स्वास्थ्य के लिए योग का अभ्यास करते हैं, लेकिन सही विधि के बिना किया गया अभ्यास लाभ की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है। कई लोग अनजाने में ऐसी गलतियां करते हैं, जिससे उन्हें योग का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
इस लेख में हम योगाभ्यास में होने वाली सामान्य गलतियों और उनसे बचने के सही तरीकों को विस्तार से समझेंगे।
👉 इस विषय पर इंग्लिश में पढ़ें: Common Mistakes in Yoga Practice
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| योग अभ्यास के दौरान छोटी-छोटी गलतियां इसके लाभ को कम कर सकती हैं |
विषय सूची (Table of Contents)
- योगाभ्यास में होने वाली सामान्य गलतियां
- गलतियां आसन अभ्यास में
- गलतियां प्राणायाम अभ्यास में
- गलती: ध्यान (Meditation) का अभ्यास न करना
- योगाभ्यास के अंत में ध्यान क्यों जरूरी है
- सारांश
- FAQ
योगाभ्यास में होने वाली सामान्य गलतियां
योग सरल, सुरक्षित तथा विज्ञान सम्मत विधि है। यह ऋषियों द्वारा विकसित एक उत्तम अभ्यास है। सामान्यतः स्वास्थ्य के लिए योगाभ्यास में तीन मुख्य अभ्यास किए जाते हैं:
- आसन: शरीर को लचीला और मजबूत बनाने वाला शारीरिक अभ्यास
- प्राणायाम: ऊर्जा देने वाला श्वसन अभ्यास
- ध्यान: मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ाने वाला अभ्यास
इन तीनों का अपना-अपना महत्व है, लेकिन इनका अभ्यास सही विधि और उचित क्रम से करना आवश्यक है।
नए अभ्यासी (Beginner) अक्सर आसन और प्राणायाम में गलतियां कर बैठते हैं। इस कारण उन्हें योग के पूर्ण लाभ प्राप्त नहीं हो पाते और कई बार शरीर में खिंचाव, दर्द या असंतुलन भी हो सकता है।
आगे हम इन्हीं सामान्य गलतियों को विस्तार से समझेंगे।
गलतियां आसन अभ्यास में
योगाभ्यास में पहला क्रम आसन का है। इसलिए शुरुआत यहीं से ही करनी चाहिए। इसके बाद प्राणायाम का अभ्यास करें। योग दर्शन के अनुसार अष्टांगयोग में प्राणायाम से पहले आसन का ही स्थान बताया गया है।
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| भुजंगासन करते समय सही मुद्रा बनाए रखना रीढ़ की लचीलापन और ताकत को बढ़ाता है |
विस्तार से जानें- प्राणायाम से पहले आसन का अभ्यास क्यों?
आसन शरीर को मजबूती देने वाला एक शारीरिक अभ्यास है। इस अभ्यास में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
अधिकतर नए अभ्यासी आसन करते समय कुछ सामान्य गलतियां कर बैठते हैं, जैसे गलत स्थान का चयन, गलत आसनों का चुनाव, जल्दबाजी करना, गलत क्रम अपनाना या अपनी क्षमता से अधिक अभ्यास करना।
इन गलतियों के कारण शरीर में दर्द, खिंचाव या चोट का खतरा बढ़ सकता है और योग के अपेक्षित लाभ भी नहीं मिल पाते।
आइए इन सभी गलतियों को विस्तार से समझते हैं।
गलत स्थान का चयन
योगासन हमेशा स्वच्छ, शांत और हवादार स्थान पर करना चाहिए। प्रदूषित, शोरगुल वाले या अव्यवस्थित वातावरण में अभ्यास न करें। ऐसे वातावरण में अभ्यास करने से ध्यान भटकता है और श्वास प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।
प्राकृतिक वातावरण या पार्क जैसा स्थान योगाभ्यास के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। अभ्यास करते समय समतल स्थान का चयन करें और हमेशा योग मैट या साफ कपड़ा बिछाकर ही आसन करें।
गलत स्थान पर अभ्यास करने से शरीर को चोट लगने या तनाव की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए स्थान का चयन सावधानी से करें।
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| प्राकृतिक वातावरण में योगाभ्यास करने से ध्यान, श्वास और मानसिक शांति में सुधार होता है |
गलत आसनों का चयन
हर व्यक्ति के शरीर की संरचना, लचीलापन और क्षमता अलग-अलग होती है। इसलिए एक ही आसन सभी के लिए समान रूप से लाभदायक नहीं होता।
कई लोग दूसरों को देखकर कठिन आसनों का अभ्यास करने लगते हैं, जो उनके लिए हानिकारक हो सकता है।
हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता और अवस्था के अनुसार ही आसनों का चयन करें। जो आसन आपको सहज और आरामदायक लगें, वही आपके लिए अधिक लाभदायक होते हैं।
जल्दबाजी में आसन करना
योगाभ्यास में जल्दबाजी करना एक सामान्य लेकिन गंभीर गलती है। योग कोई तेज़ गति से किया जाने वाला व्यायाम नहीं, बल्कि एक नियंत्रित और संतुलित प्रक्रिया है।
प्रत्येक आसन की शुरुआत धीरे-धीरे करें, उसकी अंतिम स्थिति में पहुंच कर कुछ देर रुकें और फिर सहजता से वापस आएं।
एक आसन के बाद कुछ सेकेंड विश्राम करना भी जरूरी है, ताकि शरीर अगले आसन के लिए तैयार हो सके। अंत में शवासन में विश्राम अवश्य करें, जिससे पूरे अभ्यास का प्रभाव संतुलित हो सके।
आसनों को गलत क्रम से करना
योगासन का सही क्रम बहुत महत्वपूर्ण होता है। गलत क्रम से किया गया अभ्यास शरीर में असंतुलन पैदा कर सकता है और अंगों में तनाव व हानि का कारण भी बन सकता है।
अभ्यास की शुरुआत सूक्ष्म व्यायाम (Warm-up) से करें। इसके बाद खड़े होकर, फिर बैठकर और अंत में लेटकर आसनों का अभ्यास करें।
सभी आसनों के अंत में शवासन अवश्य करें, जिससे शरीर को पूर्ण विश्राम मिल सके।
👉 देखें – आसन का सही क्रम क्या है?)
असंतुलित अभ्यास न करें
कुछ आसन शरीर के अंगों को केवल एक ओर ही प्रभावित करते हैं। यदि केवल ये ही किए जाएं तो शरीर में असंतुलन उत्पन्न हो सकता है। इसलिए पूरक (Complementary) या विपरीत आसनों का अभ्यास करना आवश्यक होता है।
उदाहरण के लिए, पीछे की ओर झुकने वाले आसनों के बाद आगे की ओर झुकने वाले आसनों का अभ्यास करना चाहिए। इससे शरीर का संतुलन बना रहता है और अंगों में तनाव का खतरा कम होता है। पूरक आसन योग का सही समन्वय है।
क्षमता से अधिक अभ्यास करना
क्षमता से अधिक अभ्यास की गलती न करें। सभी व्यक्तियों के शरीर की क्षमता अलग-अलग होती है। इसलिए सभी आसन अपनी क्षमता अनुसार ही करें।
कठिन तथा क्षमता से अधिक किए गए आसन हानिकारक हो सकते हैं। सरल आसन हमेशा लाभदायी होते हैं। जिस आसन की स्थिति में सुखपूर्वक अधिक देर रुक सकते हैं, वही आसन करें।
गलतियां प्राणायाम अभ्यास में
प्राणायाम योग का एक महत्वपूर्ण श्वसन अभ्यास है, जो श्वसन तंत्र (Respiratory System) को मजबूत करता है और शरीर में प्राण-ऊर्जा (Energy Flow) को संतुलित करता है। इस अभ्यास का आधार “श्वास” है, इसलिए इसे हमेशा सही तकनीक और श्वास की क्षमता के अनुसार करना आवश्यक है।
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| प्राणायाम करते समय सही मुद्रा में बैठना श्वास नियंत्रण और फेफड़ों की क्षमता को बेहतर बनाता है |
आजकल कई लोग बिना सही मार्गदर्शन के प्राणायाम करना शुरू कर देते हैं, जिससे वे अनजाने में कुछ सामान्य गलतियां कर बैठते हैं। जैसे गलत पोज में बैठना, अपनी शारीरिक अवस्था को नजरअंदाज करना या श्वास को क्षमता से अधिक रोकने का प्रयास करना।
इन गलतियों के कारण रक्तचाप असंतुलन या श्वास संबंधी समस्या हो सकती है और प्राणायाम के वास्तविक लाभ भी नहीं मिल पाते।
आइए प्राणायाम अभ्यास में होने वाली इन सामान्य गलतियों को विस्तार से समझते हैं।
गलत पोज मे बैठना
प्राणायाम करते समय सही बैठने की स्थिति (Posture) बहुत महत्वपूर्ण होती है। गलत पोज में बैठने से श्वास प्रक्रिया प्रभावित होती है और फेफड़ों की क्षमता पूरी तरह उपयोग नहीं हो पाती।
प्राणायाम के लिए पद्मासन या सुखासन सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। यदि कोई व्यक्ति जमीन पर बैठने में असुविधा महसूस करता है, तो वह कुर्सी पर बैठकर भी अभ्यास कर सकता है।
ध्यान रखें कि रीढ़ (Spine) हमेशा सीधी रहे और शरीर सामान्य तथा आरामदायक स्थिति में हो। झुककर या तनाव में बैठकर प्राणायाम करने से बचें।
शरीर की अवस्था अनुसार अभ्यास न करना
हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और स्वास्थ्य अलग होता है, इसलिए प्राणायाम का अभ्यास भी उसी के अनुसार करना चाहिए।
उच्च रक्तचाप (High BP), गर्भावस्था, हृदय रोग या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में तीव्र या कठिन प्राणायाम करना हानिकारक हो सकता है।
ऐसी स्थिति में हमेशा सरल और धीमी गति वाले प्राणायाम का अभ्यास करें और आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।
श्वास की क्षमता से अधिक अभ्यास
प्राणायाम में श्वास को जबरदस्ती रोकना या अपनी क्षमता से अधिक अभ्यास करना एक गंभीर गलती है।
हर व्यक्ति की श्वास क्षमता अलग होती है, इसलिए अभ्यास हमेशा अपनी सीमा के भीतर ही करना चाहिए।
विशेष रूप से नए अभ्यासी शुरुआत में सरल प्राणायाम करें और धीरे-धीरे अभ्यास की अवधि बढ़ाएं। अधिक समय तक श्वास रोकने का प्रयास हानिकारक हो सकता है।
मौसम के विपरीत अभ्यास
प्राणायाम का प्रभाव शरीर के तापमान और ऊर्जा पर पड़ता है, इसलिए इसे मौसम के अनुसार करना बहुत जरूरी है।
कुछ प्राणायाम शरीर को गर्म करते हैं (जैसे भस्त्रिका, सूर्यभेदी), जबकि कुछ ठंडक प्रदान करते हैं (जैसे शीतली, शीतकारी)।
मौसम के विपरीत प्राणायाम करने से शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है और असुविधा हो सकती है।
👉 सही जानकारी के लिए देखें – मौसम के अनुसार प्राणायाम कोनसे हैं?)
रोग की अवस्था मे अभ्यास
यदि किसी व्यक्ति को श्वास संबंधी समस्या, अस्थमा या हृदय रोग है, तो प्राणायाम करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
ऐसी स्थिति में श्वास रोकने वाले कुम्भक प्राणायाम न करें और केवल सरल अभ्यास ही करें।
बीमारी के दौरान गलत तरीके से किया गया प्राणायाम समस्या को बढ़ा सकता है, इसलिए आवश्यकता होने पर प्रशिक्षित व्यक्ति के मार्गदर्शन में ही अभ्यास करें।
लगातार अभ्यास करना
प्राणायाम करते समय बिना रुके लगातार अभ्यास करना भी एक सामान्य गलती है।
हर प्राणायाम के बाद कुछ समय के लिए श्वास को सामान्य होने दें। इसके बाद ही अगला अभ्यास शुरू करें।
यह प्रक्रिया शरीर को संतुलित रखती है और थकान या असहजता से बचाती है।
गलती: ध्यान (Meditation) का अभ्यास न करना
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| योगाभ्यास के बाद ध्यान करने से मन शांत होता है और पूरे अभ्यास का लाभ बढ़ जाता है |
आजकल स्वास्थ्य के लिए योग करने वाले अधिकांश लोग केवल आसन और प्राणायाम तक ही सीमित रहते हैं। वे ध्यान (Meditation) को आवश्यक नहीं समझते, जबकि यह योगाभ्यास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
वास्तव में, केवल शारीरिक अभ्यास (आसन) और श्वसन अभ्यास (प्राणायाम) करने से योग की प्रक्रिया पूरी नहीं होती। मन को शांत और स्थिर करने के लिए ध्यान का अभ्यास करना भी उतना ही आवश्यक है।
आसन और प्राणायाम के बाद कुछ समय शांत बैठकर ध्यान करने से शरीर और मन दोनों को गहरा विश्राम मिलता है। इससे एकाग्रता बढ़ती है, तनाव कम होता है और पूरे योगाभ्यास के लाभ कई गुना बढ़ जाते हैं।
इसलिए योगाभ्यास को पूर्ण और प्रभावी बनाने के लिए ध्यान को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
योगाभ्यास के अंत में ध्यान क्यों जरूरी है
ध्यान (Meditation) योगाभ्यास का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। यह मन को शांत करने, विचारों को नियंत्रित करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायता करता है।
आसन और प्राणायाम के बाद शरीर और श्वास पहले से अधिक संतुलित हो जाते हैं। यह अवस्था ध्यान के लिए सबसे उपयुक्त होती है, क्योंकि इस समय मन स्वाभाविक रूप से शांत होने लगता है।
ध्यान के नियमित अभ्यास से:
- मानसिक तनाव और चिंता कम होती है
- एकाग्रता (Concentration) में सुधार होता है
- नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है
- भावनात्मक संतुलन बना रहता है
- आत्म-जागरूकता (Self-awareness) बढ़ती है
यदि योगाभ्यास के अंत में कुछ मिनटों तक ध्यान किया जाए, तो यह पूरे अभ्यास को अधिक प्रभावी बना देता है और शरीर-मन दोनों को गहरा संतुलन प्रदान करता है।
सारांश (Conclusion)
योगाभ्यास एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली प्रक्रिया है, जो शरीर और मन दोनों को संतुलित रखती है। लेकिन यदि इसे सही विधि से न किया जाए, तो इसके लाभ कम हो सकते हैं या हानि भी हो सकती है।
इस लेख में बताई गई सामान्य गलतियां—जैसे गलत आसनों का चयन, गलत क्रम, जल्दबाजी, श्वास नियंत्रण में त्रुटि और ध्यान को नजरअंदाज करना—अक्सर नए अभ्यासी करते हैं।
यदि आप इन गलतियों से बचते हुए सही तकनीक, सही क्रम और अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास करते हैं, तो योग से अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
नियमितता, धैर्य और सजगता ही सफल योगाभ्यास की कुंजी है।
FAQ
Q1. योगाभ्यास में सबसे सामान्य गलतियां कौन सी हैं?
योगाभ्यास में सामान्य गलतियां जैसे गलत पोज, गलत श्वास, जल्दबाजी में आसन करना और क्षमता से अधिक अभ्यास करना शामिल हैं।
Q2. क्या गलत तरीके से योग करना हानिकारक हो सकता है?
हाँ, गलत तरीके से किया गया योग शरीर में खिंचाव, दर्द या चोट का कारण बन सकता है।
Q3. नए अभ्यासी योग में गलतियों से कैसे बच सकते हैं?
नए अभ्यासी धीरे-धीरे शुरुआत करें, सही तकनीक अपनाएं और अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास करें।
Q4. क्या प्राणायाम सभी के लिए सुरक्षित है?
प्राणायाम सामान्यतः सुरक्षित है, लेकिन स्वास्थ्य समस्याओं वाले व्यक्तियों को सावधानी से अभ्यास करना चाहिए।
Q5. योगाभ्यास के अंत में ध्यान क्यों करना चाहिए?
ध्यान करने से मन शांत होता है, एकाग्रता बढ़ती है और योगाभ्यास के लाभ अधिक प्रभावी हो जाते हैं।
Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक क्षमता, स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग होती हैं।
योगाभ्यास हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार और सही विधि से करें। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या अन्य चिकित्सीय स्थिति में योग शुरू करने से पहले विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
गलत तरीके से किया गया अभ्यास हानिकारक हो सकता है।




