प्राणायाम योग का एक महत्वपूर्ण अभ्यास है। "श्वास" इसका मुख्य आधार है। इस अभ्यास में सही विधि से श्वास लेने (पूरक), रोकने (कुम्भक) और छोड़ने (रेचक) की तकनीक बताई जाती है। यह श्वसन तंत्र को सुदृढ़ करने वाला ऊर्जादायी अभ्यास है।
नियमित अभ्यास से फेफड़े सक्रिय रहते हैं, हृदय स्वस्थ रहता है और मन शांत रहता है। सभी स्वस्थ व्यक्ति अपने श्वास की क्षमता अनुसार इसका अभ्यास कर सकते हैं, लेकिन यह अभ्यास कुछ स्थितियों में वर्जित भी है। प्राणायाम क्या है? इसके स्वास्थ्य लाभ और सावधानियां क्या हैं? प्रस्तुत लेख में इन विषयों को विस्तार से बताया जाएगा।
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| नियमित और सही विधि से प्राणायाम का अभ्यास श्वसन तंत्र, हृदय और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। |
विषय सूची
प्राणायाम के स्वास्थ्य लाभ
नियमित और सही प्राणायाम से श्वसन तंत्र मजबूत होता है, हृदय और रक्तचाप संतुलित रहते हैं, तनाव कम होता है और शरीर को ऊर्जा मिलती है।
| लाभ का क्षेत्र | प्राणायाम से मिलने वाला लाभ |
|---|---|
| श्वसन तंत्र | फेफड़े सक्रिय रहते हैं और श्वसन प्रणाली मजबूत होती है। अस्थमा जैसे रोगों से बचाव में सहायता मिलती है |
| हृदय और रक्तचाप | शरीर को पर्याप्त Oxygen मिलती है, हृदय स्वस्थ रहता है और रक्तचाप (BP) सामान्य रहता है |
| मानसिक स्थिति और नींद | तनाव और चिंता कम होती है, मन शांत रहता है, एकाग्रता और नींद बेहतर होती है |
| पाचन | पाचन की क्रिया को सहयोग मिलता है |
| ऊर्जा | प्राण-शक्ति बढ़ती है और शरीर ऊर्जावान रहता है |
| नाड़ियाँ | प्राणिक नाड़ियों का शोधन होता है और उनके अवरोध दूर होते हैं |
| कफ, वात, पित्त | तीनों का संतुलन बना रहता है |
| शुगर और अन्य तत्व | शरीर के 'शुगर' तथा अन्य 'रसायनों' की सही मात्रा बनी रहने में सहायता मिलती है |
| रोग प्रतिरोधक क्षमता | रोगों से लड़ने की क्षमता (Immunity) बढ़ती है |
ये लाभ कैसे मिलते हैं?
श्वसन तंत्र और हृदय: सामान्य जीवन में हम जो श्वास लेते हैं, वे बहुत छोटे होते हैं और शरीर के लिए पर्याप्त नहीं होते। प्राणायाम में श्वास लम्बे और गहरे होते हैं। इससे फेफड़ों का अधिक भाग सक्रिय होता है और शरीर को पर्याप्त मात्रा में Oxygen मिलती है। यही श्वसन तंत्र और हृदय के स्वास्थ्य का आधार है।
मानसिक प्रभाव: श्वास का मन से भी गहरा संबंध है। जब श्वास असंतुलित होती है तो मन चंचल होता है, और जब श्वास धीमी और स्थिर होती है तो मन शांत होता है। इसीलिए नियमित प्राणायाम तनाव कम करने और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक होता है। 2012 की एक शोध-समीक्षा (International Journal of Preventive Medicine) में भी तनाव में कमी और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के संतुलन का उल्लेख है।
प्राणायाम क्या है?
प्राणायाम श्वास पर आधारित योग की उच्च कोटि की क्रिया है। यह अष्टांग योग का चौथा अंग है।
'प्राणायाम' शब्द का अर्थ
यह 'प्राण' और 'आयाम', दो शब्दों से मिलकर बना है।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| प्राण | जीवनी ऊर्जा-शक्ति, जो शरीर में संचारित होती है |
| आयाम | विस्तार और नियमन (संयम) |
अर्थात् श्वास के माध्यम से प्राण-शक्ति को नियमित करने और उसे बढ़ाने का अभ्यास प्राणायाम है।
प्राणायाम और सामान्य श्वास में अंतर
श्वास एक ऐसी क्रिया है जो आजीवन, दिन-रात निरंतर चलती रहती है। सामान्य श्वास और प्राणायाम-श्वास में क्या अंतर है, यह तालिका में देखें।
| विषय | सामान्य श्वास | प्राणायाम श्वास |
|---|---|---|
| क्रिया कैसे होती है | अपने-आप, निरंतर | विधिपूर्वक |
| श्वास का स्वरूप | छोटी-छोटी | लम्बी और गहरी |
| श्वास रोकना (कुम्भक) | नहीं | क्षमता अनुसार |
| शरीर के लिए | शरीर को जीवित रखने के लिए | पर्याप्त Oxygen और ऊर्जा |
पतंजलि योगसूत्र में प्राणायाम की परिभाषा
महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र के साधन पाद में प्राणायाम को परिभाषित किया है :-
सूत्र का अर्थ : आसन सिद्ध हो जाने के बाद श्वास लेने और छोड़ने की सहज गति को कुछ देर रोकना प्राणायाम है।
सूत्र का भावार्थ : आसन के बाद प्राणायाम में रेचक, पूरक और कुम्भक का अभ्यास करें।
रेचक, पूरक और कुम्भक
सामान्य श्वास में दो ही अवस्थाएं होती हैं :- श्वास का लेना और छोड़ना। लेकिन प्राणायाम अभ्यास में ये तीन अवस्थाएं बताई गई हैं।
| अवस्था | क्या करना है |
|---|---|
| रेचक | श्वास को बाहर निकालना |
| पूरक | श्वास को अन्दर भरना |
| कुम्भक | श्वास को रोकना (अन्दर या बाहर) |
प्राणायाम अभ्यास में इन तीनों अवस्थाओं का महत्व है, लेकिन वास्तविक लाभ कुम्भक में ही निहित हैं।
योगसूत्र के अनुसार प्राणायाम के तीन प्रकार
योगसूत्र (2.50) में प्राणायाम के तीन प्रकार बताए गए हैं :-
| प्राणायाम प्रकार | श्वास की स्थिति |
|---|---|
| बाह्य वृत्ति | श्वास को बाहर छोड़कर क्षमता अनुसार रोकना |
| आभ्यन्तर वृत्ति | श्वास को अन्दर भरकर क्षमता अनुसार रोकना |
| स्तम्भ वृत्ति | श्वास जहाँ है, वहीं स्थिर हो जाना (यह स्थिति बिना प्रयास स्वतः बनती है) |
अभ्यासी की स्थिति के अनुसार प्राणायाम
सभी व्यक्तियों के शरीर और श्वास की स्थिति अलग-अलग होती है। इसलिए सभी को अपनी क्षमता अनुसार अभ्यास करना चाहिए।
| अभ्यासी की स्थिति | कौन-सा प्राणायाम करें | सावधानियां |
|---|---|---|
| स्वस्थ व नियमित अभ्यासी | अपनी क्षमता और मौसम के अनुसार सभी प्राणायाम कुम्भक सहित कर सकते हैं | आवृत्तियां अपनी क्षमता अनुसार करें |
| स्वस्थ नए अभ्यासी | आरम्भ में बिना कुम्भक सरल प्राणायाम करें | धीरे-धीरे कुम्भक का अभ्यास बढ़ाएं |
| रोग प्रभावित अभ्यासी | अपने चिकित्सक की सलाह के बिना कोई प्राणायाम न करें | कुम्भक और तीव्र गति वाले प्राणायाम न करें; चिकित्सक द्वारा बताई गई औषधि का सेवन जारी रखें |
स्वास्थ्य के लिए प्राणायाम का सही क्रम
आसन के बाद विधिपूर्वक प्राणायाम का अभ्यास करें।
- खाली पेट, आसन के बाद प्राणायाम आरम्भ करें।
- बैठने की स्थिति का सही चयन करें (पद्मासन या सुखासन, रीढ़ सीधी)।
- अनुभवी और नियमित अभ्यासी अपनी आवश्यकता अनुसार कुम्भक सहित अभ्यास करें।
- नए अभ्यासी आरम्भ में ये अभ्यास सरलता से करें :
- कपालभाति
- अनुलोम विलोम
- भ्रामरी
- अपनी क्षमता अनुसार अभ्यास करने के बाद श्वास को सामान्य करें।
- कुछ देर निर्विचार, मन को एकाग्र करके शांत अवस्था में बैठें और ध्यान को आज्ञा चक्र में केन्द्रित करें।
मौसम के अनुसार प्राणायाम में सावधानी
प्राणायाम का अभ्यास सभी प्रकार के मौसम में लाभकारी होता है, लेकिन कुछ अभ्यास किसी एक मौसम में अधिक लाभकारी होते हैं और दूसरे मौसम में हानिकारक भी हो सकते हैं।
| मौसम | लाभकारी अभ्यास | इस मौसम में न करें |
|---|---|---|
| गर्मी | शीतली, शीतकारी और चंद्रभेदी | भस्त्रिका और सूर्यभेदी |
| सर्दी | भस्त्रिका, सूर्यभेदी | शीतली, शीतकारी और चंद्रभेदी |
हर मौसम के लिए उपयुक्त अन्य अभ्यासों की जानकारी मौसम के अनुसार प्राणायाम लेख में दी गई है।
प्राणायाम की सावधानियां
सामान्य सावधानियां
| क्या करें | क्या न करें |
|---|---|
| अपने शरीर की क्षमता के अनुसार अभ्यास करें | श्वास के साथ बल प्रयोग न करें |
| कुम्भक लगाते समय श्वासों की स्थिति देखें | आरम्भ में अधिक कुम्भक न लगाएं |
| आरम्भ में सरल प्राणायाम करें, धीरे-धीरे बढ़ाएं | क्षमता से अधिक देर श्वास न रोकें |
| नियमित और शांत मन से अभ्यास करें | असुविधा होने पर अभ्यास जारी न रखें |
अभ्यास तुरंत रोकने के संकेत
- चक्कर आना या सिर हल्का लगना
- घबराहट या बेचैनी
- छाती में दर्द या भारीपन
- श्वास में घुटन
वर्जित स्थितियां
- श्वास रोगी और हृदय रोगी कुम्भक न लगाएं।
- सर्जरी के बाद या गंभीर रोग की स्थिति में चिकित्सक की सलाह के बिना अभ्यास न करें।
सारांश
पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1. प्राणायाम के मुख्य स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?
प्राणायाम श्वसन तंत्र को मजबूत करता है, हृदय को स्वस्थ और रक्तचाप को संतुलित रखने में सहायक है, तनाव कम करता है और शरीर को ऊर्जा देता है। नियमित अभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
प्रश्न 2. प्राणायाम का असर कितने समय में दिखता है?
यह हर व्यक्ति में अलग होता है और नियमितता पर निर्भर करता है। नियमित अभ्यास के कुछ सप्ताह बाद ऊर्जा, नींद और मन की शांति में अंतर महसूस हो सकता है।
प्रश्न 3. क्या प्राणायाम से रक्तचाप (BP) नियंत्रित हो सकता है?
नियमित और सरल प्राणायाम रक्तचाप को संतुलित रखने में सहायक होता है। उच्च रक्तचाप में कुम्भक और तीव्र प्राणायाम न करें।
प्रश्न 4. क्या दवा चल रही हो तो प्राणायाम कर सकते हैं?
सामान्यतः सरल प्राणायाम चिकित्सक की सलाह से किया जा सकता है। प्राणायाम दवा का विकल्प नहीं है, इसलिए दवा अपनी मर्जी से बन्द या कम न करें।
प्रश्न 5. प्राणायाम में श्वास नाक से लें या मुँह से?
सामान्य जीवन में श्वास नासिका से ही लेना और छोड़ना चाहिए। प्राणायाम अभ्यास में भी अधिकांश अभ्यास नासिका से श्वास लेते-छोड़ते हुए किए जाते हैं। लेकिन शीतली और शीतकारी में श्वास मुख से लिया जाता है और नासिका से छोड़ा जाता है।
प्रश्न 6. प्राणायाम और योग में क्या अंतर है?
योग एक विस्तृत विषय है और प्राणायाम योग का एक अंग है। पतंजलि के अष्टांग योग में आठ अंग बताए गए हैं :- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। इनमें प्राणायाम चौथा अंग है और आसन के बाद आता है। अर्थात् प्राणायाम पूरा योग नहीं है, बल्कि योग का एक महत्वपूर्ण अभ्यास है।
