शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग एक लाभदायी अभ्यास है। मूलतः यह एक आध्यात्मिक क्रिया है। "आसन" को योग का एक महत्वपूर्ण अंग माना गय है। आसन को नियमित रूप से करने से शरीर के अंग सक्रिय होते हैं, रक्त-संचार सुचारू रहता है और पाचन-क्रिया सुदृढ़ होती है। लेकिन आसन का पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे नियमपूर्वक, सही तैयारी के साथ और सावधानी से किया जाए। प्रस्तुत लेख में योगासन से पहले और अभ्यास के दौरान रखी जाने वाली व्यावहारिक बातों व सावधानियों के बारे में बताया जाएगा।
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| शांत व खुले वातावरण में नियमपूर्वक योगासन का अभ्यास। |
विषय सूची :-
आसन पतंजलि योग में
अभ्यास से पहले की तैयारी
अभ्यास के दौरान सावधानियां
करें / न करें
किन्हें आसन नहीं करना चाहिए
सामान्य प्रश्न
'आसन' पतंजलि योग में
महर्षि पतंजलि ने अपने "योगसूत्र" के दूसरे अध्याय में "अष्टांगयोग" का वर्णन किया है। आसन इसका तीसरा चरण है। पतंजलि इसे परिभाषित करते हुए सूत्र देते हैं — स्थिरसुखम् आसनम् ।। 2.46 ।। अर्थात् स्थिरता से और सुखपूर्वक स्थिति में ठहरना आसन है। इसी सूत्र के आधार पर आसन के नियम व सावधानियां तय होती हैं। इस सूत्र में महर्षि पतंजलि ने परिभाषित करते हुए बताया है कि आसन क्या है।
अभ्यास से पहले की तैयारी
समय : सुबह का समय योगासन के लिए उत्तम माना गया है, लेकिन शाम के समय भी किया जा सकता है। योगासन हमेशा खाली पेट किया जाना चाहिए — यदि दिन में किसी अन्य समय करना हो तो भोजन के लगभग 3 घंटे बाद ही करें। इसका एक अपवाद वज्रासन है, जो भोजन के तुरंत बाद भी किया जा सकता है।
स्थान : योगासन के लिए खुले, हवादार व स्वच्छ स्थान का चयन करें। पार्क या प्राकृतिक वातावरण वाली जगह अच्छी होती है, लेकिन यदि पार्क उपलब्ध न हो तो योगासन घर पर भी किया जा सकता है। योगासन हमेशा समतल स्थान पर दरी, चटाई या योगा-मैट बिछाकर करना चाहिए।
वस्त्र : योगासन के लिए ढीले व आरामदायक वस्त्र पहनें, मौसम के अनुसार। तंग कपड़े रक्त-संचार व श्वास के प्रवाह में बाधा डाल सकते हैं।
स्नान : स्नान के बाद योगासन करना उत्तम माना गया है। यदि स्नान से पहले योगासन करना है, तो उसके तुरंत बाद स्नान न करें — शरीर को सामान्य होने के लिए कुछ समय दें।
क्रम : आसन शुरू करने से पहले सूक्ष्म व्यायाम या वार्म-अप करें, फिर आसन आरम्भ करें। योग में सही क्रम का विशेष महत्व है — पहले खड़े होकर, फिर बैठकर, इसके बाद पेट के बल और पीठ के बल आसन करने चाहिए, और अंत में शवासन अवश्य करें।
अभ्यास के दौरान सावधानियां
एकाग्रता : अभ्यास के दौरान एकाग्रता बहुत जरूरी है — आंखें बंद रखें, ध्यान को शरीर के प्रभावित अंगों पर केंद्रित करें और शांत रहें।
क्षमता का ध्यान रखें : प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग-अलग होती है — अपनी क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही आसन करें। क्षमता से अधिक या बलपूर्वक किया गया अभ्यास हानिकारक हो सकता है।
विश्राम : एक आसन करने के बाद कुछ देर विश्राम करें, फिर अगला आसन करें। यह शरीर को अगले आसन के लिए तैयार करता है।
पूरक आसन का अभ्यास : कुछ आसनों के पूरक आसन या सहायक आसन होते हैं, जो पहले किए गए आसन से विपरीत दिशा में किए जाते हैं और उसका लाभ बढ़ाते हैं। इनका अभ्यास अवश्य करना चाहिए।
करें / न करें
| करें | न करें |
|---|---|
| सुबह या शाम, खाली पेट अभ्यास करें | भरे पेट (वज्रासन को छोड़कर) अभ्यास न करें |
| खुले, हवादार व स्वच्छ स्थान का चयन करें | बंद, अस्वच्छ या असमतल स्थान पर अभ्यास न करें |
| ढीले व आरामदायक वस्त्र पहनें | तंग वस्त्रों में अभ्यास न करें |
| सरल आसनों से आरम्भ करके क्रमशः कठिन आसनों की ओर बढ़ें | शुरुआत में ही कठिन आसन करने की कोशिश न करें |
| अपनी क्षमता के अनुसार आसन करें | क्षमता से अधिक या बलपूर्वक अभ्यास न करें |
| चक्कर या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत रुक जाएं | असहजता या कमजोरी में भी अभ्यास जारी न रखें |
| अभ्यास के अंत में शवासन अवश्य करें | शवासन के बिना अभ्यास समाप्त न करें |
| गंभीर रोग, सर्जरी, गर्भावस्था में चिकित्सक की सलाह लें | ऐसी स्थितियों में बिना सलाह के अभ्यास न करें |
किन्हें आसन नहीं करना चाहिए
निम्नलिखित स्थितियों में आसन का अभ्यास न करें, या केवल चिकित्सक की सलाह के बाद ही करें :
- गंभीर रोग की अवस्था में
- हाल ही में हुई सर्जरी के बाद
- गर्भावस्था के दौरान
- मासिक धर्म के आरम्भिक दिनों में
- अत्यधिक वृद्ध अवस्था में
इन सभी स्थितियों का विस्तृत विवरण योग कब नहीं करना चाहिए लेख में दिया गया है।
सामान्य प्रश्न
योग आसन के नियम क्या हैं?
सही समय पर व खाली पेट अभ्यास करना, उचित व स्वच्छ स्थान चुनना, ढीले वस्त्र पहनना, स्नान का सही क्रम रखना और सरल से कठिन आसन की ओर क्रमशः बढ़ना — ये योग आसन के मुख्य नियम हैं।
आसन करते समय कौनसी सावधानी बरतें?
अभ्यास के दौरान एकाग्रता बनाए रखें, अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक बल न लगाएं, और यदि चक्कर या कमजोरी महसूस हो तो आसन तुरंत बंद कर दें।
स्नान आसन से पहले करना चाहिए या बाद में?
दोनों तरीके सही हैं, लेकिन स्नान के बाद योगासन करना अधिक उत्तम माना गया है। यदि स्नान से पहले अभ्यास करते हैं, तो उसके तुरंत बाद स्नान न करें — शरीर को सामान्य होने के लिए थोड़ा समय दें।
योगासन का पूरा लाभ पाने के लिए सही समय, स्थान, वस्त्र व स्नान-अंतराल का ध्यान रखना चाहिए, और अभ्यास के दौरान अपनी क्षमता व शरीर के संकेतों पर ध्यान देना चाहिए।
यह लेख किसी रोग का उपचार करने हेतु नहीं है। इस लेख का उद्देश्य केवल योग की सही जानकारी देना है। योग क्रियाएं केवल स्वस्थ व्यक्तियों के लिए हैं। अस्वस्थ व्यक्ति को चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
