अक्सर लोग केवल आसन और प्राणायाम को ही योग मान लेते हैं। नए योग अभ्यासियों के मन में यह सवाल रहता है कि आसन-प्राणायाम और योग में वास्तविक अन्तर क्या अंतर है। क्या आसन-प्राणायाम ही सम्पूर्ण योग है?
इस लेख में हम सरल भाषा में समझेंगे कि योग क्या है, आसन क्या है और प्राणायाम का वास्तविक स्थान क्या है, साथ ही पतंजलि योगसूत्र के अनुसार सम्पूर्ण योग की अवधारणा भी जानेंगे।
योग तथा आसन-प्राणायाम में क्या अन्तर है?
योग को स्वास्थ्य के लिए एक उत्तम विधि माना जाता है। इसलिए आज के समय मे पूरा विश्व 'योग' को अपना रहा है। लेकिन नए अभ्यासियों (Beginners) के प्राय: कुछ ये प्रश्न होते हैं :--
- योग और योगा मे क्या फर्क है?
- योग और योगासन (आसन) मे क्या अन्तर है?
- क्या आसन-प्राणायाम ही योग हैं?
इन सब प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए पहले हमे पहले कुछ विषयों को समझना होगा :-
- योग क्या है?
- आसन क्या है?
- प्राणायाम क्या है?
आईए इनको विस्तार से समझ लेते हैं।
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योग क्या है?
भारत को योग का जनक माना जाता है। आरम्भ मे यह आध्यात्म का विषय रहा है। प्राचीन काल मे ऋषि मुनि तथा योगी "ध्यान-साधना" हेतू इसका अभ्यास करते थे। ध्यान-साधना हेतू शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमारे ऋषियों ने कुछ योग क्रियाओं को अविष्कृत किया है।
आज उन्ही योग क्रियाओं का अभ्यास हम अपने स्वास्थ्य के लिए करते हैं। इन क्रियाओं में आसन व प्राणायाम मुख्य हैं। लेकिन ये योग के महत्वपूर्ण अंग हैं, ये सम्पूर्ण योग नही हैं।
योग की परिभाषा
महर्षि पतंजलि ने चित्तवृत्ति निरोध को योग कहा है। वे योग को परिभाषित करते हुए एक सूत्र देते हैं :
"योगश्चित्तवृत्तिनिरोध:"
(अर्थात् चित्त वृत्तियों का निरोध करना ही योग है।)
चित्त वृत्ति निरोध का मार्ग 'अष्टांगयोग' बताया है। यह सम्पूर्ण योग है। इसके आठ अंग है। इन आठ अंगो में आसन व प्राणायाम भी हैं।
अष्टाँग योग क्या है?
अष्टांग योग को सम्पूर्ण योग कहा गया है। इसके आठ अंग बताए गए हैं। इसके आठ अंग ये हैं :--
- यम
- नियम
- आसन
- प्राणायाम
- प्रत्याहार
- धारणा
- ध्यान
- समाधि
(विस्तार से देखें :- अष्टाँगयोग क्या है?)
सम्पूर्ण योग के लिए अष्टांगयोग का पालन करना चाहिए। लेकिन आज के समय मे जो व्यक्ति केवल स्वास्थ्य हेतू योग करते हैं, वे केवल आसन व प्राणायाम का ही अभ्यास करते हैं। योग की ये दोनो क्रियाएं बहुत महत्वपूर्ण हैं। आईए इन दोनों को विस्तार से समझ लेते हैं।
आसन क्या है?
- आसन अष्टांगयोग का तीसरा चरण है
- यह योग का एक शारीरिक अभ्यास है
- यह शरीर के अंगो व मासपेशियों को सुदृढ व सक्रिय बनाए रखता है
- इसका नियमित अभ्यास पेट के आन्तरिक अंगों को स्वस्थ रखता है
- शरीर के रक्त संचार को व्यवस्थित करता है
- यह योग का एक महत्वपूर्ण अंग है
आसन की परिभाषा
आसन क्या है, यह समझने के लिए महर्षि पतंजलि का एक सूत्र बहुत महत्वपूर्ण है। आसन को परिभाषित करते हुए महर्षि पतंजलि एक सूत्र देते हैं:-
"स्थिर: सुखमासनम्"
अर्थात् स्थिरता व सुखपूर्वक जिस पोज मे हम बैठते हैं, वह आसन है। सरल शब्दों में कहा जा सकता कि सरलता से और शरीर के अंगों को आराम देने वाले अभ्यास करने चाहिए।
कोन से आसन लाभदाई हैं?
पतंजलि योग के अनुसार जो आसन हम स्थिरता व सुखपूर्वक कर सकते हैं, वही हमारे लिए लाभदाई होते हैं। अर्थात् जिस आसन के अभ्यास में हमे सुख की अनुभूति होती है, और जिस आसन की स्थिति में सरलता से ठहर सकते हैं, ऐसे आसन अवश्य करने चाहिए। कठिन व कष्टदाई आसन का अभ्यास नही करना चाहिए।
शरीर की क्षमता अनुसार आसन :- हम सब के शरीरों की स्थितियां व क्षमताएं अलग-अलग होती हैं। अत: अपनी क्षमता अनुसार ही अभ्यास किया जाना चाहिए। क्षमता से अधिक व बलपूर्वक किया गया अभ्यास हानिकारक हो सकता है।
मुख्य आसन अभ्यास
आसन का अभ्यास अपने शरीर की क्षमता अनुसार करना चाहिए। सामान्यत: किए जाने वाले आसन इस प्रकार हैं :
खड़े होकर किए जाने वाले आसन
- सूर्य नमस्कार
- ताड़ासन
- त्रिकोण आसन
बैठ कर किए जाने वाले आसन
- पश्चिमोत्तान आसन
- अर्ध मत्स्येंद्रासन
- गो मुखासन
- वज्रासन
लेट कर किए जाने वाले आसन
- भुजंग आसन
- धनुरासन
- पवन मुक्तासन
- सर्वांगासन
- शव आसन
आसन का अभ्यास अपने शरीर की अवस्था के अनुसार ही करें। नए अभ्यासी (Beginners) पहले कुछ दिन केवल सरल अभ्यास करे।
आसन का अभ्यास कैसे किया जाता है पूरी जानकारी के लिए देखें :- सरल योगासन
आसन के लाभ
- शरीर के अंगों को मजबूती मिलती है
- शरीर के आन्तरिक अंग जैसे- आंत, किडनी, लीवर व पैनक्रियाज सक्रिय होते है
- पाचन क्रिया सुदृढ होती है
- रक्त संचार व्यवस्थित होता है
- शरीर के सभी रासायनिक तत्व संतुलित रहते हैं
- आसन का अभ्यास रक्तचाप को संतुलित करता है
- हृदय को स्वस्थ रखता है
- रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) की वृद्धि करता है
आसन की सावधानियां
आसन का अभ्यास शरीर के लिए लाभदाई है। लेकिन कुछ सावधानियों के साथ इसका अभ्यास करना चाहिए। असावधानी से किया गया अभ्यास हानिकारक हो सकता है।
- अपनी क्षमता के अनुसार आसन का अभ्यास करें
- बलपूर्वक तथा क्षमता से अधिक अभ्यास न करें
- रोग की अवस्था मे अभ्यास न करें
- किसी अंग की शाल्य क्रिया (सर्जरी) के बाद अभ्यास नही करना चाहिए
- गर्भवती महिलाएं सरल क्रिया चकित्सक की सलाह से करें
- कठिन आसन न करें
- लगातार आसन न करें
- एक आसन करने के बाद कुछ देर विश्राम करें
- विश्राम के बाद अगला आसन करें
आसन का अभ्यास कैसे करें?
सुबह का समय योगासन के लिए उत्तम होता है। हमेशा खाली पेट योगाभ्यास करना चाहिए।
खाना खाने के तुरंत बाद अभ्यास न करें। योगाभ्यास की विधि :
- दरी, चटाई या मैट बिछा कर अभ्यास करें
- सही स्थान का चयन करें
- पार्क जैसा प्राकृतिक स्थान उत्तम है
- यदि घर पर अभ्यास करना है तो खुले व हवादार स्थान का चयन करें
- आसनों का चयन अपने शरीर की क्षमता अनुसार करें
- लगातार अभ्यास न करें
- एक आसन करने के बाद दूसरा आसन करने से पहले कुछ सेकंड का विश्राम करें
- सभी आसन करने के बाद सीधे पीठ के बल लेट कर शव आसन मे विश्राम करें
- विश्राम के बाद प्राणायाम का अभ्यास करें
प्राणायाम क्या है?
प्राणायाम योग का एक श्वसन अभ्यास है। यह अष्टांग योग का चौथा चरण है। आसन के बाद इसका अभ्यास किया जाना चाहिए। 'श्वास' इस क्रिया का आधार है। इस अभ्यास मे श्वास लेने, छोड़ने व कुछ देर रोकने की सही विधि बताई जाती है।
प्राणायाम की परिभाषा
प्राण-शक्ति को आयाम देना प्राणायाम है। महर्षि पतंजलि प्राणायाम को परिभाषित करते हुए एक सूत्र देते हैं:-
"तस्मिन्सति श्वासप्रश्वासयोर्गतिविच्छेद: प्राणायाम:।"
अर्थात् (आसन अभ्यास के बाद) श्वास लेने व छोड़ने की गति को कुछ देर रोकना, प्राणायाम की स्थिति है।
इस सूत्र का भावार्थ है कि लम्बा-गहरा श्वास लेना-छोड़ना तथा श्वास को क्षमता अनुसार रोकना ही प्राणायाम है।
कौन से प्राणायाम लाभदाई हैं
प्राणायाम का अभ्यास करते समय अपनी श्वास की स्थिति का अवलोकन करें। सरलता से किए जाने वाले अभ्यास लाभदाई होते है। श्वास को बलपूर्वक तथा क्षमता से अधिक रोकना हानिकारक हो सकता है।
प्राणायाम के लाभ
- इस अभ्यास से श्वसनतंत्र सुदृढ होता है
- प्राणिक नाड़ियों के अवरोध हटते है
- प्राण ऊर्जा की वृद्धि होती है
- इस अभ्यास से शरीर को आक्सीजन पर्याप्त मात्रा मे मिलती है
- इसका नियमित अभ्यास हृदय व फेफड़ों को स्वस्थ रखता है
- यह शरीर को ऊर्जा देने वाला अभ्यास है
- यह रक्तचाप को सामान्य रखता है
- इसका नियमित अभ्यास शरीर की इम्युनिटी को बढाता है
प्राणायाम की सावधानियां
हम सब के श्वासों की स्थिति अलग-अलग होती है। अत: हमे अपने श्वास की स्थिति के अनुसार ही प्राणायाम अभ्यास करना चाहिए। अभ्यास करते समय इन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए :-
- प्राणायाम का अभ्यास अपने श्वासों की क्षमता अनुसार करें
- नियमित अभ्यासी तथा सुदृढ श्वसन वाले व्यक्ति कुम्भक* सहित प्राणायाम करें
(*कुम्भक :-श्वास को अन्दर या बाहर कुछ देर के लिए रोकना "कुम्भक" कहा गया है।)
- नए अभ्यासी आरम्भ मे बिना कुम्भक का सरल अभ्यास करें। धीरे-धीरे कुम्भक का अभ्यास आरम्भ करें।
- श्वास के गम्भीर रोगी इस अभ्यास को न करें
- उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति तीव्र गति से अभ्यास न करें।
प्राणायाम कैसे करें?
आसन के बाद कुछ देर विश्राम करें। विश्राम करने के बाद प्राणायाम का अभ्यास करें। प्राणायाम की सही विधि:
- पद्मासन या सुखासन की स्थिति मे बैठें
- रीढ व गर्दन को सीधा रखें
- आँखें कोमलता से बन्ध करें
- दोनों हाथ घुटनों पर ज्ञान मुद्रा की स्थिति मे रखें
- पहले श्वास-प्रश्वास का अभ्यास करें
- लम्बा गहरा श्वास लें और छोड़ें
- 4 या 5 श्वास का अभ्यास करने के बाद अन्य प्राणायाम करें
कुछ अन्य लाभदाई प्राणायाम
- कपालभाति
- अनुलोम विलोम
- भ्रामरी
- नाड़ी शोधन
सरलता और सही विधि से किए गए अभ्यास अधिक लाभकारी होते हैं। प्राणायाम अभ्यास की अधिक जानकारी के लिए देखें:- प्राणायाम अभ्यास की सही विधि और सही क्रम
अपनी क्षमता अनुसार अभ्यास करने के बाद अन्त मे श्वासों को सामान्य करें। कुछ देर ध्यान की स्थिति मे बैठें।
योग व आसन प्राणायाम मे अन्तर
लेख मे हम यह जान चुके हैं कि योग, आसन व प्राणायाम क्या हैं। अब जो प्रश्न प्राय: पूछे जाते हैं, उनके विषय पर विचार कर लेते हैं।
योग और योगा मे क्या फर्क है?
योग (Yog) व योगा (Yoga) दोनो एक ही हैं। इन दोनों मे कोई अन्तर नहीं है। केवल उच्चारण का अन्तर है। योग संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है जोड़ना। अंग्रेजी भाषा मे इसका उच्चारण "योगा" किया जाता है।
योग व आसन मे क्या फर्क है?
"योग" एक विस्तृत विषय है। इसके आठ अंग होते हैं। "आसन" इसका एक अंग है। यह शरीर को सुदृढ़ करने वाला अभ्यास है। इसका नियमित अभ्यास शरीर के आंतरिक अंगों को प्रभावित करता है। यह योग का एक महत्वपूर्ण शारीरिक अभ्यास है।
क्या आसन-प्राणायाम ही योग है?
आधुनिक समय में स्वास्थ्य के लिए केवल आसन और प्राणायाम का ही अभ्यास किया जाता है। लेकिन सम्पूर्ण योग अष्टांगयोग ही है। आसन व प्राणायाम इसके दो महत्वपूर्ण अंग हैं। अत: केवल आसन-प्राणायाम योग मान लेना सही नहीं हैं। संतुलित आहार, शुद्ध विचार और अनुशासित जीवनशैली भी योग का हिस्सा हैं।
लेख सारांश
योग स्वास्थ्य के लिए एक उत्तम विधि है। सम्पूर्ण-योग के आठ अंग बताए गए हैं। केवल आसन व प्राणायाम योग नहीं है, बल्कि ये दोनों योग के महत्वपूर्ण अंग है। "आसन" एक शारीरिक अभ्यास है। "प्राणायाम" एक श्वसन अभ्यास है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q. क्या केवल आसन और प्राणायाम ही योग है?
नहीं, केवल आसन प्राणायाम योग नहीं हैं। सम्पूर्ण योग अष्टांग योग है, जिसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि शामिल हैं। आसन योग का तीसरा और प्राणायाम चौथा चरण हैं।
Q. योग और योगासन में क्या अंतर है?
योग एक सम्पूर्ण जीवन पद्धति है, जबकि योगासन योग का केवल एक शारीरिक अभ्यास है।
Q. क्या योग और योगा अलग हैं?
नहीं। योग (Yog) और योगा (Yoga) एक ही हैं, केवल उच्चारण का अंतर है। हिंदी व संस्कृत भाषा में इसे योग (yog) ही कहा जाता है। English भाषा में इसका उच्चारण योगा (Yoga) हो जाता है।
Q. योग का अभ्यास कब करना चाहिए?
योग का अभ्यास हमेशा खाली पेट करना चाहिए। सुबह का समय योगाभ्यास के लिए सही माना गया है। यदि दिन में किसी और समय योगाभ्यास करना है तो खाना खाने के तुरंत बाद अभ्यास न करें। रोग की अवस्था में अभ्यास न करें। प्राणायाम में अपने श्वास की स्थिति का ध्यान रखें।
Q. क्या सभी लोग योग का अभ्यास कर सकते हैं?
केवल स्वस्थ व्यक्ति ही योग का अभ्यास कर सकते हैं। रोगी व्यक्ति को चिकित्सक या योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। श्वास रोगी को प्राणायाम अभ्यास नहीं करने चाहिए। नए अभ्यासी आरम्भ में सरल आसन और सरल प्राणायाम अभ्यास ही करें।
Disclaimer
यह लेख चिकित्सा हेतू नही है। यह योग की एक सामान्य जानकारी है। योग की सभी क्रियाएं स्वस्थ व्यक्तियों के लिए हैं। अस्वस्थ व्यक्ति को इसका अभ्यास अपने चिकित्सक की सलाह से करना चाहिए। नए व्यक्ति आरम्भ में केवल सरल अभ्यास ही करें। क्षमता अनुसार किया गया अभ्यास लाभदाई होता है कठिन अभ्यास हानिकारक हो सकते हैं।
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