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प्राणायाम एक ऊर्जादायी और लाभकारी अभ्यास है, लेकिन इसमें सावधानी की भी जरूरत होती है। कई बार अभ्यासी जल्दी लाभ पाने की चाह में कुछ छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे अभ्यास का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। इस लेख में हम प्राणायाम अभ्यास में होने वाली कुछ सामान्य गलतियों के बारे में जानेंगे।

स्वच्छ और प्राकृतिक वातावरण में प्राणायाम का अभ्यास करती हुई महिला
सही स्थान और स्वच्छ वातावरण में किया गया प्राणायाम अभ्यास अधिक प्रभावी होता है।

अभ्यास से पहले की गलतियाँ

प्राणायाम का अभ्यास शुरू करने से पहले ही कुछ गलतियां हो जाती हैं। सही स्थान, सही समय और सही क्रम — इन तीनों का ध्यान न रखना अभ्यास की नींव को कमजोर कर देता है।

गलत स्थान का चयन

शोरगुल वाले, प्रदूषित या बंद कमरे में अभ्यास करना एक आम गलती है। प्राणायाम में श्वास की गति पर पूरा ध्यान रखना होता है, इसलिए शांत और स्वच्छ वातावरण जरूरी है। शोर और प्रदूषण दोनों एकाग्रता को तोड़ते हैं और अभ्यास का लाभ कम कर देते हैं।

आरंभिक नियमों का पालन न करना

कुछ अभ्यासी बिना तैयारी के ही अभ्यास शुरू कर देते हैं। यह भी एक बड़ी गलती है। जैसे —

  • खाना खाने के तुरंत बाद योगाभ्यास करना
  • योगा मैट या कपड़ा बिछाए बिना अभ्यास करना
  • अभ्यास से पहले मन को शांत और एकाग्र न करना

गलत क्रम से योगाभ्यास करना

प्रायः नए अभ्यासी गलत क्रम से योगाभ्यास करते हैं। कुछ व्यक्ति पहले प्राणायाम करते हैं और आसन बाद में, या इनमें से केवल एक ही अभ्यास करते हैं — दोनों गलत हैं। सही यह है कि पहले आसन का अभ्यास करें, उसके बाद प्राणायाम करें। योगाभ्यास का सही क्रम जानना इसलिए जरूरी है कि अभ्यास का पूरा लाभ सही अनुक्रम में ही मिलता है।

अभ्यास के दौरान होने वाली गलतियाँ

अभ्यास शुरू होने के बाद भी कई गलतियां होती हैं जो धीरे-धीरे आदत बन जाती हैं। मुद्रा, एकाग्रता, क्रम और गति — इन चारों का ध्यान रखना जरूरी है।

गलत मुद्रा में बैठना

कमर या रीढ़ को झुकाकर बैठना एक सामान्य गलती है। इस अभ्यास में रीढ़ का विशेष महत्व है क्योंकि शरीर की मुख्य नाड़ियां यहीं से गुजरती हैं। रीढ़ टेढ़ी हो तो श्वास की गति भी प्रभावित होती है।

सही मुद्रा इस प्रकार रखें:

  • रीढ़ सीधी रखें, लेकिन अत्यधिक तनाव न हो
  • पद्मासन में परेशानी हो तो किसी भी आरामदायक पोज में बैठें
  • हाथ घुटनों पर रखें
  • आंखें कोमलता से बंद करें

गलत क्रम से प्राणायाम करना

बहुत से लोगों को यह नहीं पता होता कि प्राणायाम अभ्यास का सही क्रम क्या होना चाहिए। इसलिए वे जो मन में आए, वही अभ्यास कर लेते हैं। यह सही नहीं है — हर प्राणायाम का शरीर पर अलग प्रभाव होता है, इसलिए उचित क्रम में ही अभ्यास करना चाहिए।

एकाग्रता न रखना

एकाग्रता से किया गया प्राणायाम अधिक लाभदायी होता है। मन इधर-उधर भटकता रहे तो प्राणायाम का प्रभाव कम हो जाता है। इसलिए पूरा ध्यान श्वास की गति पर रखना चाहिए।

अपनी क्षमता का गलत आकलन

कुछ व्यक्ति प्राणायाम करते समय अपनी क्षमता से अधिक कठिन अभ्यास करने लगते हैं। ऐसा करना कई बार नुकसानदायक भी हो जाता है। अपने शरीर और श्वास की वर्तमान स्थिति के अनुसार ही अभ्यास करें — यही सही दृष्टिकोण है।

क्षमता से अधिक कुम्भक करना

कुम्भक यानी श्वास को रोकना प्राणायाम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई बार नए अभ्यासी अधिक लाभ पाने के लिए श्वास को क्षमता से अधिक देर तक रोकने का प्रयास करते हैं। यह एक गंभीर गलती है। नए अभ्यासी और कमजोर श्वसन वाले व्यक्ति को कुम्भक नहीं करना चाहिए।

जल्दबाजी में अभ्यास करना

जल्दबाजी में प्राणायाम करना सही नहीं है। सभी अभ्यास सहज गति से करें। एक प्राणायाम पूरा होने के बाद श्वास को सामान्य होने दें, तभी अगला अभ्यास शुरू करें।

मौसम के विरुद्ध अभ्यास

कुछ प्राणायाम मौसम के अनुसार किए जाने चाहिए। मौसम के अनुसार प्राणायाम कैसे करें, यह जानना जरूरी है — मौसम के विपरीत अभ्यास करना नुकसानदायक हो सकता है।

अभ्यास के बाद की गलतियाँ

अभ्यास खत्म होने के बाद भी कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। अभ्यास के तुरंत बाद शरीर एक विशेष अवस्था में होता है — इस समय की गई गलतियां अभ्यास के लाभ को कम कर सकती हैं।

बिना विश्राम अगला अभ्यास शुरू करना

एक प्राणायाम पूरा होने के तुरंत बाद बिना रुके दूसरा शुरू कर देना गलत है। हर अभ्यास के बाद श्वास को सामान्य होने दें और कुछ क्षण विश्राम करें।

अभ्यास के तुरंत बाद ठंडा पानी पीना

प्राणायाम के तुरंत बाद ठंडा पानी पीना शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। कुछ देर विश्राम के बाद ही पानी पिएं, और हमेशा सामान्य तापमान का पानी ही लें।

अभ्यास के तुरंत बाद स्नान करना

अभ्यास से पहले स्नान करना उत्तम माना जाता है। यदि किसी कारण से स्नान बाद में करना हो तो अभ्यास के तुरंत बाद न करें। शरीर को सामान्य स्थिति में आने का समय दें, कुछ देर विश्राम के बाद ही स्नान करें।

सारांश

प्राणायाम का पूरा लाभ पाने के लिए सही विधि उतनी ही जरूरी है जितना नियमित अभ्यास। सही स्थान, सही क्रम, सही मुद्रा और अभ्यास के बाद की सावधानियां — इन बातों का ध्यान रखकर आप अपने प्राणायाम अभ्यास को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बना सकते हैं।

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: क्या प्राणायाम से श्वास रोग ठीक होते हैं?

उत्तर: योग का कोई भी अभ्यास चिकित्सा का विकल्प नहीं है। प्राणायाम श्वसन तंत्र को सुदृढ़ करता है, लेकिन रोग की अवस्था में चिकित्सक की सलाह के बिना अभ्यास नहीं करना चाहिए।

प्रश्न: पहले कौन सा अभ्यास करें — आसन या प्राणायाम?

उत्तर: सही क्रम में पहले आसन, फिर प्राणायाम करना चाहिए। इससे शरीर और श्वसन तंत्र दोनों अभ्यास के लिए तैयार हो जाते हैं।

प्रश्न: क्या प्राणायाम नुकसानदायक भी हो सकता है?

उत्तर: क्षमता से अधिक, बलपूर्वक और नियम-विरुद्ध किया गया प्राणायाम नुकसानदायक हो सकता है। सरल और क्षमता अनुसार किया गया अभ्यास हानिकारक नहीं होता।

प्रश्न: प्राणायाम के बाद कितनी देर बाद पानी पीना चाहिए?

उत्तर: अभ्यास के कम से कम 15-20 मिनट बाद ही पानी पीना उचित है।

Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में प्राणायाम शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक या प्रशिक्षित योग गुरु से सलाह अवश्य लें।

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