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"प्राणायाम" योग का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह एक श्वसन क्रिया है। इसका नियमित अभ्यास फेफड़ों को सक्रिय रखता है तथा श्वसनतंत्र को सुदृढ करता है। यह हृदय को स्वस्थ रखने की उत्तम विधि है, तथा स्वास्थ्य के लिये लाभदायी अभ्यास है।

लेकिन क्या असावधानी से किया गया प्राणायाम नुकसान भी कर सकता है? इसका उत्तर है — हाँ। नुकसान स्वयं प्राणायाम से नहीं होता, बल्कि इसे करने के गलत तरीके से होता है। प्रस्तुत लेख में हम जानेंगे कि यह नुकसान वास्तव में किन कारणों से होता है, इसके चेतावनी संकेत क्या हैं, और इससे कैसे बचा जा सकता है।

महिला सावधानी से सरल प्राणायाम का अभ्यास करते हुए
सही विधि व सावधानी से किया गया प्राणायाम सदैव लाभदायी होता है।

विषय सूची :-

  1. प्राणायाम नुकसानदायक क्यों होता है?
  2. कुम्भक की असावधानी से नुकसान
  3. गलत प्राणायाम का चुनाव भी नुकसान का कारण
  4. मौसम के विपरीत अभ्यास का प्रभाव
  5. क्षमता से अधिक व बलपूर्वक अभ्यास
  6. चेतावनी के संकेत — कब अभ्यास तुरंत रोकें
  7. किन अवस्थाओं में विशेष सावधानी जरूरी है
  8. नुकसान से बचाव के उपाय
  9. सारांश
  10. FAQ
  11. Disclaimer

प्राणायाम नुकसानदायक क्यों होता है?

प्राणायाम स्वयं एक लाभदायी क्रिया है। यह नुकसान नहीं करता, बल्कि इसे करने का गलत तरीका नुकसान का कारण बनता है। मुख्य रूप से ये पाँच कारण इसके लिये जिम्मेदार होते हैं :-

  1. कुम्भक का असावधानी से प्रयोग
  2. अपनी शारीरिक अवस्था के विपरीत प्राणायाम का चुनाव
  3. मौसम के विपरीत अभ्यास
  4. क्षमता से अधिक व बलपूर्वक अभ्यास
  5. रोग या विशेष शारीरिक अवस्था में बिना सावधानी अभ्यास

आगे लेख में इन सभी कारणों को विस्तार से समझेंगे।

कुम्भक की असावधानी से नुकसान

प्राणायाम में "कुम्भक" का विशेष महत्व है। पतंजलि योग में कुम्भक को ही वास्तविक प्राणायाम बताया गया है, और प्राणायाम के अधिकतर लाभ इसी से प्राप्त होते हैं। इसलिए एक नियमित अभ्यासी को बंध व कुम्भक का प्रयोग करना चाहिए। लेकिन असावधानी से लगाया गया कुम्भक कई बार हानिकारक भी हो जाता है।

कुम्भक कब हानिकारक बनता है?

  • बल पूर्वक श्वास को रोकना
  • अपनी क्षमता से अधिक समय तक श्वास रोकना
  • बिना क्रमिक अभ्यास के सीधे लम्बा कुम्भक लगाना
  • श्वसन की स्थिति ठीक न होने पर भी कुम्भक का प्रयोग करना

किन व्यक्तियों के लिए कुम्भक विशेष जोखिम भरा हो सकता है?

सामान्य रोग जैसे अस्थमा या हृदय रोग के अतिरिक्त, ये अवस्थाएं भी ध्यान देने योग्य हैं :-

  • उच्च रक्तचाप तथा हृदय की धमनियों से जुड़ी समस्या (Coronary Artery Disease) वाले व्यक्ति
  • किसी मानसिक रोग की औषधि (दवा) नियमित रूप से ले रहे व्यक्ति

ऐसे व्यक्तियों को कुम्भक का अभ्यास बिना चिकित्सक या योग्य योग प्रशिक्षक की सलाह के नहीं करना चाहिए।

गलत प्राणायाम का चुनाव भी नुकसान का कारण

हर प्राणायाम सभी व्यक्तियों के लिए एक समान उपयुक्त नहीं होता। अपनी वर्तमान शारीरिक अवस्था के विपरीत प्राणायाम का चुनाव भी नुकसानदायी हो सकता है।

तीव्र गति वाले प्राणायाम

कपालभातिभस्त्रिका जैसे तीव्र गति वाले प्राणायाम, उच्च रक्तचाप तथा कमजोर श्वसन वाले व्यक्तियों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

कुम्भक आधारित अभ्यास

नाड़ी शोधन जैसे कुछ प्राणायाम में बाह्य व आन्तरिक कुम्भक का प्रयोग किया जाता है। कमजोर श्वसन वाले व्यक्तियों को ऐसे अभ्यास नहीं करने चाहिए।

आंतरिक अंगों पर दबाव डालने वाले अभ्यास

शरीर के किसी आंतरिक अंग में परेशानी होने पर, उस अंग को प्रभावित करने वाला अभ्यास न करें। उदाहरण के लिए :-

  • आंत संबंधी समस्या में उदर क्षेत्र को संकुचित करने वाला उड्डयन बंध न लगाएं
  • गुदा भाग की परेशानी में मूल बंध न लगाएं
  • गले या गर्दन की समस्या में जालंधर बंध न लगाएं

इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि प्राणायाम का चुनाव अपनी वर्तमान शारीरिक अवस्था को ध्यान में रख कर ही करना चाहिए, न कि केवल लाभ देखकर।

मौसम के विपरीत अभ्यास का प्रभाव

कुछ प्राणायाम शरीर में ऊष्मा (गर्मी) बढ़ाते हैं, और कुछ शरीर को शीतलता देते हैं। इस तापीय प्रभाव के विपरीत मौसम में अभ्यास करने से शरीर का सन्तुलन बिगड़ सकता है।

प्राणायाम शरीर पर प्रभाव वर्जित मौसम संभावित नुकसान
भस्त्रिका ऊष्मा बढ़ाता है गर्मी जलन, थकान, चक्कर
सूर्यभेदी ऊष्मा बढ़ाता है गर्मी अत्यधिक गर्मी, बेचैनी
शीतली / शीतकारी शीतलता देता है शरद ऋतु जुकाम, जोड़ों में जकड़न
चंद्रभेदी शीतलता देता है शरद ऋतु अत्यधिक ठंडक

इस बात का ध्यान रखें कि मौसम के अनुकूल प्राणायाम करना ही सदैव लाभकारी होता है।

क्षमता से अधिक व बलपूर्वक अभ्यास

शरीर की क्षमता से अधिक प्राणायाम करना या बल पूर्वक श्वास को नियंत्रित करना नुकसान का सीधा कारण बनता है। जब श्वसन तंत्र या मांसपेशियां इस अतिरिक्त दबाव को सहन करने में सक्षम नहीं होती, तो खिंचाव, चक्कर या सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है।

  • नये अभ्यासी विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखें
  • एक ही दिन में अभ्यास का समय अचानक न बढ़ाएं
  • किसी भी क्रिया में दर्द या असहजता महसूस होने पर रुक जाएं

चेतावनी के संकेत — कब अभ्यास तुरंत रोकें

प्राणायाम करते समय यदि शरीर इन संकेतों से सावधान करे, तो अभ्यास तुरंत रोक देना चाहिए :-

  • घबराहट या अकारण भय का बढ़ना
  • सिर भारी होना या चक्कर आना
  • सांस लेने में असहजता या तकलीफ
  • शरीर में असामान्य कंपन या बेचैनी
  • आँखों के आसपास दबाव या भारीपन महसूस होना

ऐसे संकेत मिलने पर अभ्यास रोक कर सामान्य श्वास लेना आरम्भ करें। यदि यह स्थिति बार-बार बनती है तो चिकित्सक या योग्य योग प्रशिक्षक से अवश्य सलाह लें।

किन अवस्थाओं में विशेष सावधानी जरूरी है

संक्षेप में, इन अवस्थाओं में प्राणायाम विशेष सावधानी से किया जाना चाहिए :-

  • हृदय रोगश्वास रोग (अस्थमा)
  • उच्च रक्तचाप
  • गर्भावस्था
  • वृद्धावस्था

इन सभी अवस्थाओं के बारे में जानने के बाद सरल अभ्यास चिकित्सक की सलाह से करना चाहिए।

नुकसान से बचाव के उपाय

  1. अपनी श्वास क्षमता के अनुसार ही अभ्यास करें
  2. कुम्भक का प्रयोग धीरे-धीरे व क्रमिक रूप से बढ़ाएं
  3. मौसम व अपनी शारीरिक प्रकृति के अनुसार प्राणायाम का चुनाव करें
  4. किसी रोग या विशेष अवस्था में अभ्यास से पहले चिकित्सक या योग्य योग प्रशिक्षक से परामर्श लें
  5. चेतावनी के संकेत मिलने पर अभ्यास तुरंत रोकें

सारांश

प्राणायाम स्वयं एक लाभदायी क्रिया है, यह नुकसान नहीं करता। नुकसान तब होता है जब इसे असावधानी से, बलपूर्वक, गलत मौसम में, या अपनी शारीरिक अवस्था के विपरीत किया जाए। कुम्भक का सावधानी पूर्वक प्रयोग, अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास, और चेतावनी संकेतों पर ध्यान देना — इन तीन बातों का पालन कर के प्राणायाम को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सकता है।

FAQ

प्रश्न 1 :- क्या रोजाना प्राणायाम करने से नुकसान हो सकता है?

उत्तर :- नहीं, यदि नियमित अभ्यास सही विधि व अपनी क्षमता के अनुसार किया जाए तो यह हमेशा लाभदायी रहता है। नुकसान केवल गलत तरीके से किये गए अभ्यास से होता है।

प्रश्न 2 :- कौन सा प्राणायाम सबसे अधिक सावधानी से करना चाहिए?

उत्तर :- कुम्भक सहित किये जाने वाले प्राणायाम (जैसे कि लम्बे समय तक श्वास रोकना) सबसे अधिक सावधानी मांगते हैं, क्योंकि असावधानी से इनका प्रभाव सीधा श्वसनतंत्र व हृदय पर पड़ता है।

प्रश्न 3 :- प्राणायाम करते समय चक्कर आए तो क्या करें?

उत्तर :- अभ्यास तुरंत रोक दें, सामान्य श्वास लेना आरम्भ करें, और कुछ देर विश्राम करें। यदि यह स्थिति दोबारा बने तो चिकित्सक से सलाह लें।

प्रश्न 4 :- क्या बिना किसी रोग के भी प्राणायाम नुकसान कर सकता है?

उत्तर :- हाँ। यदि मौसम के विपरीत, बलपूर्वक या क्षमता से अधिक अभ्यास किया जाए, तो स्वस्थ व्यक्ति को भी नुकसान हो सकता है।

प्रश्न 5 :- प्राणायाम का नुकसान सबसे पहले किस रूप में दिखता है?

उत्तर :- सामान्यतः घबराहट, चक्कर, सांस लेने में असहजता या बेचैनी — इन्हीं संकेतों के रूप में सबसे पहले नुकसान का पता चलता है।

Disclaimer

यह लेख योग की सामान्य जानकारी हेतु लिखा गया है। किसी प्रकार के रोग का उपचार इस लेख का उद्देश्य नहीं है। प्राणायाम क्रिया केवल स्वस्थ व्यक्तियों के लिये है। कोई भी प्राणायाम अभ्यास आरम्भ करने से पहले चिकित्सक या योग्य योग प्रशिक्षक से अवश्य सलाह लें।

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