ad-1

Dosplay ad 11may

"श्वसन" शरीर की एक अनिवार्य क्रिया है — यह प्राणों का आधार है। अनियमित जीवनशैली, बढ़ता वायु-प्रदूषण और तनाव आज श्वसन-तंत्र को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले कारण बन गए हैं, जिससे अस्थमा जैसे श्वास-रोग बढ़ रहे हैं। प्राणायाम इन अवरोधों को दूर करने में सहायक है। श्वसन तंत्र के लिए चार प्राणायाम विशेष महत्वपूर्ण माने गए हैं — ये फेफड़ों को सक्रिय करते हैं और श्वसन प्रणाली को सुदृढ़ करते हैं। इनकी सही विधि जानने से पहले श्वास और उसकी अवस्थाओं को समझना ज़रूरी है।

श्वसन तंत्र के लिए प्राणायाम करती महिला सुखासन में बैठी हुई
श्वसन तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए प्राणायाम अभ्यास करती एक महिला, सुखासन मुद्रा में।

विषय सूची

  • श्वसन तंत्र क्या है?
  • श्वसन तंत्र के लिए 4 प्रभावी प्राणायाम
  • श्वास रोगों में प्राणायाम की सावधानियां
  • सारांश
  • पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्वसन तंत्र क्या है?

शरीर के लिए श्वास का विशेष महत्व है। यह जन्म से लेकर मृत्यु तक निरंतर चलने वाली क्रिया है। श्वसन तंत्र में नासिका-द्वार, श्वास-नली तथा फेफड़े मुख्य अंग हैं, जो वायु से ऑक्सीजन लेकर रक्त के माध्यम से पूरे शरीर तक पहुंचाते हैं।

अनियमित जीवनशैली के कारण इस प्रक्रिया में अवरोध आने पर अस्थमा जैसे श्वास-रोग तथा हृदय-रोग की संभावना बढ़ जाती है। इन अवरोधों को नियमित प्राणायाम से दूर किया जा सकता है। इस अभ्यास को समझने के लिए पहले जान लेते हैं कि श्वास की तीन अवस्थाएं क्या हैं।

प्राणायाम में श्वास की तीन अवस्थाएं

सामान्यत: श्वास की दो ही अवस्थाएं हैं — लेना और छोड़ना। परंतु प्राणायाम में इन्हें तीन अवस्थाओं में बांटा गया है — 

  1. पूरक (श्वास अंदर लेना)
  2. रेचक (श्वास बाहर छोड़ना) 
  3. कुम्भक (श्वास रोकना)

पतंजलि योगसूत्र में कुम्भक को ही वास्तविक प्राणायाम कहा गया है —

तस्मिन्सति श्वासप्रश्वासयोर्गतिविच्छेद: प्राणायाम:।। सूत्र 2.49।।

(अर्थात् श्वास -प्रश्वास की गति का विच्छेद ही प्राणायाम है — यहां "गतिविच्छेद:" का अर्थ कुम्भक है।)

इसका अभ्यास कुछ सावधानियों के साथ करना चाहिए — यदि श्वासों की स्थिति ठीक न हो तो कुम्भक न लगाएं

रेचक पूरक कुम्भक विधि में इन तीनों अवस्थाओं को विस्तार से समझें।

श्वसन तंत्र के लिए 4 प्रभावी प्राणायाम


लगभग सभी प्राणायाम श्वसन प्रणाली को प्रभावित करते हैं, परंतु ये चार तकनीकें श्वसन-तंत्र के लिए विशेष रूप से लाभदायी हैं। सभी व्यक्तियों को इनका नियमित अभ्यास अपने शरीर की स्थिति और श्वास की क्षमता अनुसार करना चाहिए।

1. कपालभाति

यह मुख्यत: एक शुद्धि-क्रिया है, जो श्वसन तंत्र के लिए भी प्रभावशाली है। इससे हृदय व फेफड़े सुदृढ़ होते हैं। नए अभ्यासी या अनियमित श्वास वाले व्यक्ति इसे बिना कुम्भक के करें।

सावधानी: अस्थमा व हृदय-रोगी चिकित्सक की सलाह से, धीमी गति से करें।

कपालभाति की विधि यहां देखें।

2. अनुलोम विलोम

यह सरलता से किया जाने वाला प्राणायाम है, जिसमें चन्द्रनाड़ी और सूर्यनाड़ी क्रमश: प्रभावित होती हैं। कपालभाति के बाद इसका अभ्यास इसके लाभ को बढ़ाता है।

इस अभ्यास में बाईं नासिका से श्वास लेना, दाईं नासिका से श्वास छोड़ना, फिर दाईं नासिका से श्वास लेकर बाईं तरफ से श्वास छोड़ना होता है। इसमें श्वास रोकने की आवश्यकता नहीं है।

अनुलोम विलोम अभ्यास यहां देखें।

3. भस्त्रिका

यह फेफड़ों व श्वसन-तंत्र को मजबूती देने वाला तीव्र-गति का प्राणायाम है। इसे केवल स्वस्थ व्यक्ति ही करें।

इस अभ्यास में दोनों नासिकाओं से श्वास तीव्र गतिपूर्वक लेना और छोड़ना होता है।

सावधानी: गंभीर अस्थमा व हृदय-रोगी, गर्भवती महिलाएं और पेट-सर्जरी वाले व्यक्ति इसे न करें।

भस्त्रिका करने का तरीका यहां देखें।

4. नाड़ी शोधन

यह बहत्तर हज़ार प्राणिक नाड़ियों का शोधन करने वाला प्राणायाम है, जो श्वसन-तंत्र को सुदृढ़ करता है। यह अनुलोम विलोम जैसा ही है, बस इसमें कुम्भक जोड़ा जाता है।

सावधानी: गंभीर श्वास-रोगी कुम्भक न लगाएं।

नाड़ी शोधन प्राणायाम विस्तार से देखें।

श्वास रोगों में प्राणायाम की सावधानियां

श्वास-रोगी (जैसे अस्थमा) प्राणायाम का अभ्यास सामान्य व्यक्ति से भिन्न ढंग से करें — कुम्भक से बचें, धीमी गति रखें और चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। रोगी की स्थिति (स्वस्थ, आरंभिक या गंभीर) के अनुसार अभ्यास कैसे करें, यह [अस्थमा के लिए योग] में विस्तार से बताया गया है।

सारांश

प्राणायाम श्वसन तंत्र के लिए एक प्रभावी अभ्यास है। कपालभाति, अनुलोम विलोम, भस्त्रिका और नाड़ी शोधन — ये चारों प्राणायाम नियमित अभ्यास से फेफड़ों को सक्रिय व श्वसन प्रणाली को सुदृढ़ करते हैं। श्वासों की स्थिति ठीक होने पर ही कुम्भक का प्रयोग करें; गंभीर श्वास-रोगी कुम्भक से बचें।

पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्वसन तंत्र के लिए सबसे अच्छा प्राणायाम कौन सा है?

कपालभाति, अनुलोम विलोम, भस्त्रिका और नाड़ी शोधन — चारों श्वसन तंत्र के लिए लाभदायी हैं। शुरुआत कपालभाति व अनुलोम विलोम से करना उत्तम रहता है।

क्या रोज़ाना चारों प्राणायाम करने चाहिए?

हां, अपनी क्षमता के अनुसार क्रमवार अभ्यास किया जा सकता है। नए अभ्यासी शुरुआत में एक-दो प्राणायाम से आरंभ करें।

अस्थमा रोगी कौन सा प्राणायाम कर सकते हैं?

आरंभिक अवस्था में अनुलोम विलोम व नाड़ी शोधन (बिना कुम्भक) उपयुक्त हैं। गंभीर रोगी बिना चिकित्सक-सलाह के कोई प्राणायाम न करें।

प्राणायाम में कुम्भक कब लगाना चाहिए?

केवल तभी जब श्वासों की स्थिति सामान्य व नियंत्रित हो। श्वास-रोगी व नए अभ्यासी कुम्भक से बचें।

Disclaimer

यह आर्टिकल किसी रोग को ठीक करने का दावा नहीं करता। इसका उद्देश्य केवल प्राणायाम के लाभ से अवगत कराना है। यहां बताए गए प्राणायाम स्वस्थ व्यक्तियों के लिए हैं। गंभीर रोगी चिकित्सक की सलाह लें और लेख में दी गई सावधानियों का ध्यान रखें।

Post a Comment