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परिचय

प्राणायाम योग का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह अष्टांग योग का चौथा चरण माना गया है।

लेकिन प्राणायाम क्या है? और इसका अभ्यास सही विधि से कैसे करना चाहिए? इस सवाल का जवाब हमें महर्षि पतंजलि के प्रसिद्ध ग्रंथ "योगसूत्र" में मिलता है।

योगसूत्र के दूसरे अध्याय (साधन पाद) में पतंजलि ने प्राणायाम को विस्तार से परिभाषित किया है। उन्होंने सिर्फ definition ही नहीं दी - बल्कि इसकी तीन अवस्थाओं और सही तरीके की भी व्याख्या की है।

इस लेख में आप जानेंगे:

  • योगसूत्र के अनुसार प्राणायाम की सटीक परिभाषा
  • प्राणायाम की 3 अवस्थाएं क्या हैं
  • हर अवस्था को सही तरीके से कैसे करते हैं
  • योगसूत्र 2.49 और 2.50 का practical मतलब
  • अनुभवी अभ्यासियों के लिए Advanced 4th state का प्राणायाम

इंग्लिश भाषा में जानने के लिए पढ़ें: What is Patanjali Yoga?

पतंजलि योगसूत्र के अनुसार बाह्य वृत्ति, आभ्यन्तर वृत्ति और स्तंभ वृत्ति प्राणायाम का अभ्यास करती हुई एक महिला
पतंजलि योगसूत्र के अनुसार प्राणायाम का सही अभ्यास। पद्मासन पोज में बैठकर बाह्य वृत्ति, आभ्यन्तर वृत्ति और स्तंभ वृत्ति प्राणायाम करते हुए एक महिला अभ्यासी।

प्राणायाम और स्वास्थ्य

अक्सर कहा जाता है - "प्राणायाम high BP को control करता है" या "अस्थमा में फायदा देता है"। क्या ये सब सच है? इस विषय पर पतंजलि-योगसूत्र का नजरिया क्या है, इसको समझ लेते हैं।

"योगसूत्र" में प्राणायाम केवल एक श्वसन अभ्यास मात्र नहीं है। बल्कि यह शरीर और मन को जोड़ने का एक पुल है। साधारण भाषा में कहें - श्वसन नियंत्रण ही मानसिक एकाग्रता देता है

"मन" और "शरीर" का गहरा संबंध है। जब आप अपनी सांस को control करते हो, तो आपका mind अपने आप शांत होने लगता है। और जब mind शांत हो, तो फिर एकाग्रता बढ़ती है। हमारी मानसिक एकाग्रता हमारे दैनिक जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होती है।

महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र में प्राणायाम को कैसे परिभाषित किया है, आइए इसको विस्तार से समझते हैं।

प्राणायाम की परिभाषा - योगसूत्र 2.49

महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र के दूसरे अध्याय (साधन पाद) के 49वें सूत्र में प्राणायाम को परिभाषित किया है।

मूल संस्कृत:

तस्मिन्सति श्वासप्रश्वासयोर्गतिविच्छेद: प्राणायाम:
योगसूत्र 2.49

शब्दों का विस्तृत अर्थ:

शब्द अर्थ
तस्मिन् सति जब आसन स्थिर हो जाए (आसन की सिद्धि)
श्वास सांस को अंदर लेना (inhalation)
प्रश्वास सांस को बाहर निकालना (exhalation)
गति विच्छेद श्वास को रोकना, flow को interrupt करना

सरल अर्थ:

"जब आसन में स्थिरता आ जाए, तब श्वास-प्रश्वास की सामान्य गति को क्षमता के अनुसार रोक देना ही प्राणायाम है।"

इसका practical मतलब क्या है?

दिन-रात हम बिना किसी रुकावट के सांस लेते-छोड़ते हैं। यह क्रिया लगातार जीवन भर चलती रहती है। आप सो रहे हों, काम कर रहे हों, या दौड़ रहे हों - सांस चलती रहती है। सामान्य जीवन में श्वास की ये दो ही क्रियाएं हैं - श्वास का लेना और छोड़ना। लेकिन प्राणायाम में यह बदल जाता है।

प्राणायाम अभ्यास में ये तीन प्रकार की स्थिति हो जाती है:

  • धीरे-धीरे सांस लेना
  • धीरे-धीरे सांस छोड़ना
  • कुछ समय के लिए सांस को रोकना

यही प्राणायाम है।

योगसूत्र में तीन महत्वपूर्ण शब्द

योगसूत्र 2.49 में तीन महत्वपूर्ण शब्दों का वर्णन है, जो प्राणायाम का मूल आधार हैं:

शब्द English क्या है
श्वास (पूरक) Inhalation सांस को अंदर लेना
प्रश्वास (रेचक) Exhalation सांस को बाहर निकालना
गति विच्छेद (कुम्भक) Breath retention सांस को रोकना

रेचक, पूरक और कुम्भक ये तीनों मिलकर प्राणायाम का आधार बनाते हैं।

अगले सूत्र (योगसूत्र 2.50) में पतंजलि इन तीनों को और विस्तार से बताते हैं।

प्राणायाम की 3 अवस्थाएं (योगसूत्र 2.50)

सामान्य जीवन में हमारे श्वास की दो अवस्थाएं होती हैं, लेकिन प्राणायाम अभ्यास में ये तीन स्थितियां हो जाती हैं। इन तीनों स्थितियों का वर्णन इस सूत्र में किया गया है।

योगसूत्र 2.50:

बाह्याभ्यन्तरस्तम्भवृत्तिर्देशकालसंख्याभि: परिदृष्टो दीर्घसूक्ष्म:
योगसूत्र 2.50

शब्दों का अर्थ:

शब्द अर्थ
बाह्य वृत्ति श्वास को बाहर निकलकर कुछ देर रोकना (External breath control)
आभ्यन्तर वृत्ति श्वास को क्षमता अनुसार अंदर रोकना (Internal breath control)
स्तम्भ वृत्ति श्वास की यथा स्थिति में रुकना (Suspended breath)
देश श्वास कहाँ तक जाती है (Location/depth)
काल कितने समय के लिए रोकते हो (Time/duration)
संख्या किस ratio में करते हो (Count/ratio)

सरल अर्थ:

जब आप प्राणायाम करते हो, तो तीन प्वाइंट महत्वपूर्ण हैं:

1. गहराई (Depth): आपकी सांस की गहराई (breath) कहाँ तक जाती है - सिर्फ chest में या belly तक?

2. समय (Duration): आप कितने सेकंड के लिए सांस लेते हो? कितने सेकंड के लिए रोकते हो? कितने सेकंड में छोड़ते हो? यह समय (duration) है।

3. अनुपात (Ratio): क्या inhale:hold:exhale का कोई अनुपात है? जैसे - 4 counts में लो, 8 counts तक रोको, 4 counts में छोड़ो। यह अनुपात या ratio है।

नतीजा: इन तीनों को सही तरीके से करने के बाद आपकी श्वास लंबी (long) और सूक्ष्म (subtle) हो जाती है। और मन (mind) भी शांत हो जाता है।

योगसूत्र 2.50 - गहराई और समय का महत्व

1. गहराई (Depth):

आपकी सांस कहाँ तक जाती है - सिर्फ chest में या belly तक?

व्यावहारिक बात: जब आप पेट तक सांस भरते हैं, तो उसे diaphragmatic breathing कहते हैं - यह अधिक असरदार है। इसमें आपकी पूरी lung capacity का उपयोग होता है।

2. समय (Duration):

आप कितने समय के लिए क्या कर रहे हैं?

उदाहरण के साथ:

  • 4 counts में सांस लेते हैं
  • 4 counts के लिए सांस रोकते हैं
  • 4 counts में सांस छोड़ते हैं

व्यावहारिक बात: शुरुआत में छोटे counts (2-4) से शुरू करें। धीरे-धीरे अवधि बढ़ाएं।

3. अनुपात (Ratio):

क्या inhale:hold:exhale का कोई specific pattern है?

  • शुरुआती लोगों के लिए: 1:1:1 ratio = 4 counts लो, 4 counts रोको, 4 counts छोड़ो
  • बीच के स्तर के लिए: 1:2:2 ratio = 4 counts लो, 8 counts रोको, 8 counts छोड़ो
  • उन्नत के लिए: 1:4:2 ratio = 4 counts लो, 16 counts रोको, 8 counts छोड़ो

प्राणायाम के 3 प्रकार

योगसूत्र 2.50 में पतंजलि तीन प्रकार के प्राणायाम का वर्णन करते हैं। प्रत्येक को एक-एक करके अलग से समझते हैं।

विस्तृत जानकारी के लिए देखें: तीन प्रकार के प्राणायाम

1. बाह्य वृत्ति (External / Exhalation)

इसे बाह्य कुम्भक भी कहा जाता है।

विधि:

  • प्राणायाम अभ्यास के लिए सुविधाजनक आसन में बैठें
  • रीढ़ सीधी रखें, आंखें बंद करें
  • धीरे-धीरे लंबी और गहरी सांस लें
  • सांस को बाहर निकालें
  • खाली सांस की स्थिति में रुकें
  • क्षमता अनुसार रुकने के बाद सांस लें

2. आभ्यन्तर वृत्ति (Internal / Inhalation)

इसे आंतरिक कुम्भक भी कहा जाता है।

विधि:

  • बाह्य वृत्ति के अभ्यास के बाद शुरू करें
  • धीरे-धीरे गहरी सांस लें
  • भरी हुई सांस को अंदर रोकें
  • यह आभ्यन्तर वृत्ति है
  • क्षमता अनुसार रुकने के बाद सांस बाहर निकालें

Advanced साधकों के लिए: यदि आप नियमित अभ्यासी हैं तो त्रिबंध का भी प्रयोग कर सकते हैं। ये प्राणायाम के असर को कई गुना बढ़ा देते हैं।

3. स्तम्भ वृत्ति (Suspended)

बाह्य वृत्ति और आभ्यन्तर वृत्ति की कुछ आवृत्तियां करने के बाद यह स्थिति अप्रयास बनती है।

विधि:

  • ऊपर बताए गए दोनों अभ्यास सफलतापूर्वक करने के बाद शुरू करें
  • श्वास जिस अवस्था में है, यथा स्थिति में कुछ देर रुकें
  • यह स्तम्भ वृत्ति है
  • इसे "कैवल्य कुम्भक" भी कहते हैं - बिना प्रयास का retention

प्राणायाम के लाभ

बाह्य वृत्ति के लाभ:

  • ✅ मानसिक शांति और चिंता में कमी
  • ✅ नींद की गुणवत्ता में सुधार
  • ✅ शरीर की cooling effect
  • ✅ Parasympathetic nervous system को activate करना
  • ✅ Blood pressure में कमी
  • ✅ Mental clarity में वृद्धि

आभ्यन्तर वृत्ति के लाभ:

  • ✅ शारीरिक और मानसिक ऊर्जा में वृद्धि
  • ✅ Concentration और mental focus में सुधार
  • ✅ शरीर की internal heat बढ़ाना
  • ✅ Metabolism को activate करना
  • ✅ Confidence और courage में वृद्धि
  • ✅ मानसिक दृढ़ता आना

स्तम्भ वृत्ति के लाभ:

  • ✅ संपूर्ण शारीरिक और मानसिक संतुलन
  • ✅ गहरी आंतरिक शांति
  • ✅ Meditation के लिए mind की तैयारी
  • ✅ आध्यात्मिक विकास में सहायता
  • ✅ Self-awareness में वृद्धि

यह अभ्यास किसे नहीं करना चाहिए

Absolute Contraindications (बिल्कुल न करें):

🔴 High fever या acute illness: जब आपको तेज़ बुखार हो या कोई acute infection हो

🔴 Recent surgery के तुरंत बाद (2-3 महीने): शरीर को पहले recover करने दें

🔴 Pregnancy के पहले 3 महीने: पहली trimester में breathing control न करें

🔴 Severe heart condition या heart attack के बाद: Doctor की clearance के बिना न करें

🔴 Hernia: पेट पर pressure बनने से नुकसान हो सकता है

🔴 Brain hemorrhage या serious head injury के बाद: सिर में pressure न बनाएं

Caution के साथ करें:

⚠️ High blood pressure: बहुत हल्का अभ्यास करें, कुम्भक न करें

⚠️ Low blood pressure: कुम्भक (breath retention) बिल्कुल न करें

⚠️ Asthma: Doctor की अनुमति लें, धीरे-धीरे शुरू करें

⚠️ Anxiety disorder: केवल सरल प्राणायाम करें, कुम्भक न करें

⚠️ Thyroid patients: Doctor से specific guidance लें

⚠️ Menstruation: Heavy pranayams न करें, कुम्भक न करें

⚠️ कमजोर श्वसन system: सरल अभ्यास शुरू करें, श्वास रोकने का प्रयास न करें

Beginners के लिए विशेष सावधानियां:

🔴 कभी भी जबरदस्ती से सांस न रोकें

🔴 तुरंत advanced practices न करें

🔴 बिना proper guidance के न करें

🔴 अगर कोई समस्या हो तो तुरंत रुकें: चक्कर आना, छाती में दर्द, श्वास की घुटन

🔴 कभी भी अपनी limit से ज्यादा न करें

योगसूत्र 2.51 - चौथी अवस्था (Advanced)

योगसूत्र के 51वें सूत्र में पतंजलि एक चौथी अवस्था का वर्णन करते हैं। इसे चतुर्थ प्राणायाम कहा जाता है।

मूल संस्कृत:

बाह्याभ्यन्तरविषयाक्षेपी चतुर्थ:
योगसूत्र 2.51

सूत्र का अर्थ: बाह्य वृत्ति और आभ्यन्तर वृत्ति के विषयों से विपरीत अवस्था चतुर्थ (चौथा) प्राणायाम है।

क्या है यह चौथी अवस्था (4th state)?

यह अवस्था बाह्य, आभ्यन्तर, और स्तम्भ वृत्ति से पूर्णतया अलग है।

इसमें आप बाह्य वृत्ति के अंत में श्वास भरते हैं और आभ्यन्तर के अंत में श्वास छोड़ते हैं। लेकिन इस "श्वास लेने" और "छोड़ने" के विषयों से विपरीत क्रिया करते हैं तो यह चौथा प्राणायाम है।

महत्वपूर्ण चेतावनी:

⚠️ यह चौथा प्राणायाम beginners के लिए नहीं है।

नए अभ्यासी को पहले ऊपर बताई गई तीन अवस्थाओं का अभ्यास करना चाहिए। कम से कम 1-2 साल regular practice करें। उसके बाद सही निर्देशन में इसका अभ्यास किया जाना चाहिए। नए अभ्यासी के लिए यह अभ्यास हानिकारक भी हो सकता है।

विस्तृत जानकारी के लिए देखें: चतुर्थ प्राणायाम

लेख का सारांश

मुख्य बातें:

योगसूत्र 2.49: प्राणायाम = श्वास लेने, छोड़ने की गति को नियंत्रित करना

योगसूत्र 2.50: प्राणायाम की तीन अवस्थाएं होती हैं:

  • बाह्य वृत्ति: श्वास को बाहर रोकना
  • आभ्यन्तर वृत्ति: श्वास को अंदर रोकना
  • स्तम्भ वृत्ति: बिना किसी प्रयास के सांस को यथा स्थिति में रोकना

योगसूत्र 2.51: Advanced 4th state (केवल experienced yogis के लिए, सावधानी से)

Bottom Line: पतंजलि के अनुसार प्राणायाम एक श्वास की स्थिति है। इसका step-by-step अभ्यास करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

क्या नया व्यक्ति (Beginner) कुम्भक प्राणायाम कर सकता है?

नहीं। नए अभ्यासी को पहले साधारण प्राणायाम करने चाहिए। आरंभ में श्वास रोकने वाले अभ्यास न करें।

बाह्य, आभ्यन्तर, और स्तम्भ - सब को एक ही दिन में करना चाहिए?

हाँ। यदि आपकी श्वास की स्थिति ठीक है, तो आप अपने प्राणायाम अभ्यास में इसका अभ्यास कर सकते हैं। लेकिन यदि आप नए अभ्यासी हैं या कमजोर श्वसन है, तो इसका अभ्यास न करें।

क्या कुम्भक (सांस को रोकना) safe है?

हाँ। स्वस्थ लोगों के लिए यह safe है। लेकिन इसका अभ्यास धीरे-धीरे बढ़ाएं। कभी भी जबरदस्ती करके सांस न रोकें। अगर श्वास की घुटन या कोई परेशानी का अनुभव होता है, तो तुरंत रुक दें।

क्या प्राणायाम से पहले आसन करना चाहिए?

हाँ, यह सही है। योगसूत्र में पहले आसन और आसन के बाद प्राणायाम करने के लिए कहा गया है।

चौथा प्राणायाम (4th state) क्या है? क्या मैं इसका अभ्यास कर सकता हूँ?

यदि आप एक नियमित अभ्यासी हैं और आपकी श्वास की स्थिति ठीक है, तो आप इसका अभ्यास कर सकते हैं। लेकिन पहले किसी कुशल निर्देशन में इसका अभ्यास करना चाहिए। अपने आप इसका अभ्यास न करें।

⚠️ Disclaimer

यह लेख केवल योगसूत्र के आधार पर प्राणायाम की जानकारी देता है। यह किसी भी तरह की medical treatment की जगह नहीं ले सकता है।

यह अभ्यास निम्न के लिए है:

  • ✅ स्वस्थ व्यक्ति
  • ✅ योग के अनुभवी लोग
  • ✅ Educational और informational purposes के लिए

यह अभ्यास निम्न के लिए नहीं है:

  • ❌ Medical advice के रूप में
  • ❌ किसी disease का treatment करने के लिए
  • ❌ Self-medication की सलाह देने के लिए
  • ❌ Doctor के suggestions replace करने के लिए

अगर आपको है:

  • High blood pressure या Low blood pressure
  • Heart disease या heart condition
  • Respiratory disease (Asthma, Bronchitis, आदि)
  • Pregnancy
  • कोई chronic condition या recent surgery

तो पहले अपने doctor से consult करें। फिर एक qualified yoga instructor से proper guidance लें।

प्राणायाम को अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे करें। कभी भी जबरदस्ती या क्षमता से अधिक न करें।

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