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'योग' भारत की प्राचीन जीवन-शैली है। वैसे तो यह एक आध्यात्मिक क्रिया है लेकिन आज के समय में आम लोग इसका प्रयोग शरीर की फिटनेस के लिए करते हैं। यह पूर्णतया सुरक्षित है और विज्ञान-सम्मत क्रिया है।लेकिन क्या योग से नुकसान भी हो सकता है? योगाभ्यास मे कोन से कारण हैं जो हानिकारक हो सकते हैं? प्रस्तुत लेख में इसी विषय पर चर्चा करेंगे।

योगाभ्यास से नुकसान कैसे?

प्राचीन काल मे लोगों की स्वस्थ और लम्बी आयु होती थी क्योंकि वे योगमय जीवन जीते थे। यह सही है कि यदि योगाभ्यास सही तरीके से किया जाए तो शरीर के लिए लाभकारी है।

यदि योग लाभकारी है, तो क्या योग से नुकसान भी हो सकता है? यह सही है, गलत तरीके से किया गया अभ्यास हानिकारक भी हो सकता है। अत: योग को सही ढंग से किया जाना चाहिए।

योग पूर्णतया सुरक्षित और एक वैज्ञानिक क्रिया है। यदि इसे सावधानी से किया जाये तो यह क्रिया शरीर के लिए लाभदायक होती है। नियमित योग स्वस्थ जीवन और लम्बी आयु देता है। 

इस लिए योगाभ्यास मे हमे कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। (देखें-- कि सही योग क्या है। )

योग अभ्यास मे सावधानियां 

योगाभ्यास करते समय इन सावधानियों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए। असावधानी के कारण योग मे नुकसान भी हो सकता है। अत: योग नियम पूर्वक तथा सावधानी से करें।

सावधानी आसन करते समय

योग में आसन का अभ्यास करते समय कुछ नियम व सावधानियों को ध्यान मे रखें। असावधानी से किए गये अभ्यास से नुकसान हो सकता है। 

1. स्नान :

• आसन करने के तुरंत बाद स्नान न करें। योगाभ्यास करने से पहले स्नान करना उत्तम है। 

• यदि किसी कारणवश योगाभ्यास के बाद स्नान करना हो तो कम से कम एक घंटे के बाद स्नान करें।

• आसन के तुरंत बाद स्नान करना शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।

2. आसन कैसे करें :

• आसन करने से पहले सुक्ष्म-व्यायाम करें।
• आसन हमेशा समतल जमीन पर चटाई, दरी या कपड़ा बिछा कर ही अभ्यास करें।
• बिना आसन (Sheet) बिछाये योगाभ्यास नही करना चाहिए।

3. योगाभ्यास क्रम से करें :- 

योगाभ्यास को सही क्रम से करना लाभदायी होता है। अभ्यास के पहले क्रम में आसन का अभ्यास करना चाहिए। आसन के बाद प्राणायाम तथा अंत में ध्यान का अभ्यास चाहिए। आसन और प्राणायाम का अभ्यास भी सही समन्वय तथा क्रम से करना चाहिए।

(देखें :- आसन प्राणायाम का सही क्रम)

4. स्थान :

योगाभ्यास के लिए पार्क या कोई  खुला प्राकृतिक वातावरण उत्तम है। यदि योगाभ्यास घर पर करते हैं तो खुला और हवादार स्थान होना चाहिए। प्रदूषित वातावरण मे अभ्यास करना हानिकारक हो सकता है।

5. समय :

सुबह का समय योगाभ्यास के लिए उत्तम है। योग शाम के समय भी किया जा सकता है। योग हमेशा खाली पेट से करे।

6. आहार :

संतुलित आहार ले। खाना खाने के तुरंत बाद आसन न करें। भोजन करने के तुरंत अभ्यास करना हानिकारक हो सकता है।

शारीरिक क्षमता का ध्यान रखें

• आसन करते समय अपने शरीर की क्षमता का ध्यान रखें। नए व्यक्तियों को आरम्भ में सरल आसन करने चाहिए। कोई भी आसन करते समय शरीर के साथ बल प्रयोग न करें। उठते समय या बैठते समय हाथों के सहारा लें।

• रीढ का विशेष ध्यान रखे। रीढ को घुमाव देते समय अपनी क्षमता का ध्यान रखना चाहिए। सरलता से  जितना आसन कर सकते हैं उतना ही करें, अधिक करने का प्रयास न करें। अभ्यास को धीरे-धीरे बढाएं।

• यदि क्षमता से अधिक आसन करते है तो शरीर को हानि हो सकती है।

• आसन की पूर्ण स्थिति में धीरे-धीरे पहुंचे और धीरे-धीरे ही वापिस आए।

विपरीत आसन (पूरक आसन) भी करें

• जब आप एक आसन करते है तो उसका पूरक या विपरीत आसन भी अवश्य करें। कुछ आसनों के पूरक-आसन होते हैं, जो साथ-साथ किए जाते है।

• विपरीत आसन क्या होते है? इसको सरल शब्दों मे इस प्रकार समझें कि यदि आप एक आसन में आगे झुकते हैं तो पीछे की ओर भी झुकें। एक क्रिया बांई तरफ से करते हैं तो दांई तरफ भी करें। 

• एक आसन करने के बाद दूसरे आसन की स्थिति में जाने से पहले कुछ सैकिंड विश्राम करें। सभी आसन करने के बाद "शव आसन" अवश्य करें। यह विश्राम करने का आसन है

शव आसन क्या है?

यह शरीर को विश्राम देने की स्थिति होती है। सभी आसन करने के बाद इसे अवश्य किया जाना चाहिए।

शव आसन के लाभ :--- आसनों से आये तनाव को दूर करने के लिए यह आसन किया जाता है। ऐसा करने से आसन के लाभ और अधिक बढ जाते है।

शव आसन कैसे करें? :--- सभी आसन करने के बाद शव आसन के लिए पीठ के बल लेट जाएं। हाथ व पैरों को सीधा रखें। पूरे शरीर को ढीला छोड़ दे। सामान्य श्वास लेते हुए कुछ देर विश्राम करे।

कुछ व्यक्तियों के लिए आसन वर्जित हैं।

कुछ व्यक्तियों के लिए आसन का अभ्यास मना है। ऐसे व्यक्तियों के लिए आसन नुकसानदाई हो सकते हैं।

• अस्वस्थ व्यक्ति, गर्भवती महिलाओं और ऐसे व्यक्ति जिनके शरीर मे अभी-अभी ऑपरेशन हुआ है वे आसन न करें। ऐसे व्यक्तियों के लिए कुछ आसन हानिकारक हो सकते हैं।

• हृदय रोगी तथा अस्थमा पीड़ित व्यक्ति सरल आसन करें। कठिन आसन करने से बचें। चिकित्सक की सलाह अवश्य ले। रोग पीड़ित व्यक्ति चिकित्सक की सलाह के बिना कोई योग क्रिया न करे।

• आंत-रोगी पेट पर दबाव डालने वाले आसन न करें। ऐसा करने से आंतों को नुकसान हो सकता है।

प्राणायाम करते समय। 

आसन करने के बाद ही प्राणायाम करें। प्राणायाम मे भी कुछ सावधानियों का ध्यान रखें। असावधानी से किया गया अभ्यास नुकसानदायी हो सकता है।

बैठने की स्थिति :-- पद्मासन या सुखासन की स्थिति मे बैठें। रीढ को सीधा रखें। रीढ को झुका कर बैठने से नुकसान हो सकता है। इसलिए कमर से ऊपर के भाग को सीधा रखें

शारीरिक क्षमता :-- प्राणायाम मे भी अपने शरीर की क्षमता का ध्यान रखें। श्वासों की स्थिति के अनुसार कुम्भक का प्रयोग करे। 

श्वांस अपनी क्षमता के अनुसार रोकें। श्वांस रोकने मे बल  प्रयोग न करें। कुम्भक का समय धीरे-धीरे बढाएं।

नये अभ्यासी आरम्भ मे बिना कुम्भक का प्राणायाम करें। धीरे-धीरे कुम्भक का अभ्यास आरम्भ करें। श्वास रोकने मे अनावश्यक बल प्रयोग न करे। ऐसा करना हानिकारक हो सकता है।

अस्वस्थ व्यक्ति :-- हृदय रोगी, अस्थमा पेशंट व्यक्ति केवल सरल प्राणायाम करें और कुम्भक न लगाएं। प्रत्येक प्राणायाम के बाद श्वांसों को विश्राम दें।

सारांश :-

यदि योगाभ्यास में सावधानी न रखी जाए तो योग से नुकसान भी हो सकता है। योग सावधानी से करें। यह सरल है,सुरक्षित है और पूर्णतया वैज्ञानिक क्रिया है। योग अवश्य करें और निरोग रहें।


(योग के विषय में जानकारी व सुझाव आमंत्रित हैं)


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