योग प्राचीन भारत की एक जीवनशैली है, जिसे आज पूरा विश्व अपना रहा है। प्राचीन समय में इसका अभ्यास मुख्यतः ध्यान-साधना व आध्यात्म के लिए किया जाता था, लेकिन आज यह स्वास्थ्य के लिए एक सरल, सुरक्षित और वैज्ञानिक विधि माना जाता है। इसे हर व्यक्ति अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार कर सकता है। योग का अभ्यास शुरू करने से पहले इसे सही क्रम और विधि से समझना ज़रूरी है — यही इस लेख में बताया गया है।
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| आसन शुरू करने से पहले खड़े होकर शरीर को वार्म-अप करें। |
विषय सूची
- योग क्या है?
- आसन का अभ्यास कैसे करें
- प्राणायाम का अभ्यास कैसे करें
- ध्यान का अभ्यास कैसे करें
- योगाभ्यास के लाभ
- योगाभ्यास की सावधानियां
- FAQ
योग क्या है
योग भारत की एक प्राचीन विधि है जो आधुनिक समय में स्वास्थ्य के लिए अपनाई जा रही है। इस अभ्यास में आसन, प्राणायाम और ध्यान किया जाता है। इन्हें सही क्रम से करना चाहिए। योगाभ्यास को इस क्रम से करना चाहिए:
- आसन
- प्राणायाम
- ध्यान
आइए आगे इसको विस्तार से समझ लेते हैं।
आसन का अभ्यास कैसे करें
आसन का अभ्यास हमेशा एक निश्चित क्रम में करना चाहिए — पहले खड़े होकर, फिर बैठकर, पेट के बल और अंत में पीठ के बल। हर आसन के बाद कुछ देर विश्राम करके ही अगला आसन करें, और सभी आसनों के अंत में शवासन अवश्य करें।
खड़े होकर
- दरी या चटाई बिछाकर उस पर खड़े हो जाएं और शरीर को कुछ देर वार्म-अप करें।
- सूर्यनमस्कार का अभ्यास करें, फिर पीठ के बल लेटकर थोड़ा विश्राम करें।
बैठ कर
- पश्चिमोत्तानासन
- कमर चक्रासन (कटि चक्रासन)
- अर्धमत्स्येंद्र आसन
- वज्रासन पोज के आसन
पेट के बल
- भुजंगासन
- शलभासन
पीठ के बल
- हलासन
- मर्कटासन
- पवनमुक्तासन
- सर्वांग आसन
- मत्स्यासन
अंत में — शवासन
सभी आसनों के बाद शवासन में कुछ देर विश्राम अवश्य करें।
प्राणायाम का अभ्यास कैसे करें
आसन के अभ्यास के बाद प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए। यह श्वास पर आधारित अभ्यास है। सही विधि से किया गया अभ्यास अधिक लाभकारी होता है।
बैठने की स्थिति: पद्मासन पोज़ उत्तम है, लेकिन अपने शरीर की क्षमता अनुसार सुखासन में भी बैठ सकते हैं।
कौनसे प्राणायाम करें
प्राणायाम अभ्यास में बंध और कुम्भक को विशेष महत्व दिया गया है, लेकिन यह अभ्यास केवल नियमित अभ्यासियों को ही करना चाहिए — नए अभ्यासी शुरुआत में सरल प्राणायाम करें।
सामान्यत: किए जाने वाले प्राणायाम
प्राणायाम का चयन अपनी श्वास-स्थिति अनुसार करें। सामान्यत: किए जाने वाले अभ्यास इस प्रकार हैं:
- कपालभाति
- अनुलोम विलोम
- भ्रामरी
- नाड़ी शोधन
प्राणायाम का अभ्यास पूरा करने के बाद श्वासों को सामान्य करें और ध्यान का अभ्यास करें।
ध्यान का अभ्यास कैसे करें
प्राणायाम के बाद, श्वासों को सामान्य करके ध्यान की स्थिति में बैठें। रीढ़ सीधी रखें, आंखें बंद करें और मन को श्वास पर केंद्रित करें। शुरुआत में 5-10 मिनट पर्याप्त है, अभ्यास बढ़ने पर समय धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है। ध्यान मन को शांत और एकाग्र करता है।
योगाभ्यास के लाभ
योग के तीनों अभ्यास — आसन, प्राणायाम और ध्यान — लाभकारी होते हैं। इनके लाभ अलग-अलग और बहुआयामी होते हैं।
- आसन से शरीर लचीला व मज़बूत बनता है, आंतरिक अंग (हृदय, फेफड़े, किडनी, लीवर) स्वस्थ रहते हैं
- प्राणायाम से श्वसन तंत्र सुदृढ़ होता है और रक्तचाप संतुलित रहता है
- ध्यान से मानसिक शांति मिलती है और एकाग्रता बढ़ती है
- योग के तीनों अभ्यास शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने में सहायक होते हैं
- नियमित अभ्यास से रोग-प्रतिरोधक क्षमता (immunity) में वृद्धि होती है
- समग्र रूप से शरीर व मन दोनों स्वस्थ रहते हैं
योगाभ्यास की सावधानियां
- योग के सभी अभ्यास अपने शरीर की अवस्था और क्षमता अनुसार ही करें — आसन शारीरिक क्षमता अनुसार, प्राणायाम श्वास की क्षमता अनुसार
- योग के सभी अभ्यास लगातार और जल्दबाजी में न करें
- प्राणायाम में प्रत्येक अभ्यास के अंत में श्वास सामान्य करें
- वृद्ध व्यक्ति केवल सरल आसन या सूक्ष्म व्यायाम करें
- गर्भवती महिलाएं आसन न करें — सूक्ष्म व्यायाम या वॉक उचित है
- ऑपरेशन के बाद चिकित्सक की सलाह से ही अभ्यास शुरू करें
- अस्थमा व हृदय-रोगी/उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति कुम्भक से बचें, धीमी गति से प्राणायाम करें
- नए अभ्यासी बंध व कुम्भक का अभ्यास न करें, धीरे-धीरे बढ़ाएं
सारांश
योग सरल, सुरक्षित व लाभदायी है। आसन, प्राणायाम और ध्यान — तीनों को सही क्रम व विधि से करने पर यह शरीर और मन दोनों के लिए संपूर्ण लाभ देता है।
प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
योगाभ्यास कैसे करें?
पहले आसन, फिर प्राणायाम और अंत में ध्यान — योग का अभ्यास इसी क्रम में करना चाहिए।
क्या प्राणायाम में बंध व कुम्भक जरूरी होते हैं?
प्राणायाम में बंध व कुम्भक का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन यह सभी के लिए जरूरी नहीं है। यह अभ्यास केवल नियमित अभ्यासियों को करना चाहिए। नए अभ्यासी आरम्भ में सरल प्राणायाम कर सकते हैं।
ध्यान कब और कितनी देर करें?
आसन और प्राणायाम के बाद ध्यान का अभ्यास करें, शुरुआत में 5-10 मिनट पर्याप्त है।
Disclaimer: लेख में बताए गए अभ्यास केवल स्वस्थ व्यक्तियों के लिए हैं। रोगग्रस्त व्यक्ति चिकित्सक की सलाह के बिना कोई अभ्यास न करें। क्षमता से अधिक व बलपूर्वक किया गया अभ्यास हानिकारक भी हो सकता है। अपनी शारीरिक अवस्था अनुसार ही अभ्यास करें।
